जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंजा चिरमिरी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने की प्रदेश की खुशहाली की कामना,

जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंजा चिरमिरी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने की प्रदेश की खुशहाली की कामना,

स्मृति चिन्ह में झलकी आस्था, मुख्यमंत्री बोले: आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोएंगे धरोहर

चिरमिरी । चिरमिरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय मेले का इस वर्ष विशेष आध्यात्मिक महत्व तब और बढ़ गया, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उनके आगमन से पूरा मंदिर परिसर शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि, ढोल-नगाड़ों की गूंज और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से भक्तिमय हो उठा।   

       मंदिर प्रबंधन समिति एवं पुजारियों ने पारंपरिक रीति- रिवाजों के साथ अंगवस्त्र ओढ़ाकर और चंदन तिलक लगाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। अपार जनसमूह की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की।

भक्तिमय वातावरण में हवन-पूजन और आशीर्वाद

      मुख्यमंत्री ने यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से हवन-पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर विकास की कामना की। इसके पश्चात वे बाबा श्री पुरुषोत्तम पुरी महाराज की कुटिया पहुंचे और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। संत समाज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन समाज को नैतिक शक्ति प्रदान करता है और जनसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्य मंदिर में पूजा-अर्चना के उपरांत उन्होंने शिव मंदिर में जल अर्पित कर प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।

महाप्रसाद के साथ समानता का संदेश

     मंदिर परिसर स्थित आनंद बाजार में मुख्यमंत्री ने आमजन के साथ सादगी पूर्वक बैठकर महा प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर सामाजिक समरसता और समानता का संदेश स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। मंदिर समिति की ओर से उन्हें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं से अलंकृत स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे आस्था और उत्तरदायित्व का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसे वे आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर के रूप में संजोकर रखेंगे।

विकास और आस्था का अद्भुत समन्वय

       मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि महाशिवरात्रि हमारी सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की पवित्र भूमि ‘देवभोग’ से प्राचीन काल से भगवान जगन्नाथ के लिए चावल भेजे जाने की परंपरा रही है, जो प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

       उन्होंने कहा कि चिरमिरी में भव्य श्री जगन्नाथ मंदिर की स्थापना पूरे छत्तीसगढ़ की आस्था का केंद्र है। मंदिर प्रबंधन समिति की आवश्यकताओं पर गंभीरता से विचार करते हुए बाउंड्री वॉल निर्माण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार और महाशिवरात्रि मेले के सुचारु आयोजन हेतु आवश्यक निर्णय लेने का आश्वासन दिया।

      मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन विकास और धर्म के सुंदर समन्वय का प्रतीक है। एक ओर 127 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की ऐतिहासिक सौगात दी गई है, वहीं दूसरी ओर भगवान के चरणों में नमन कर प्रदेश की समृद्धि और जनकल्याण की मंगलकामना की गई है। उन्होंने कहा कि उनके लिए जनसेवा ही ईश्वर सेवा है । जब विकास और आस्था साथ-साथ चलते हैं, तभी समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और प्रदेश नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होता है।