बस्तर में माओवादी स्मारकों पर चल रहा साय-शाह का बुलडोजर, एक वर्ष में 70 से अधिक ध्वस्त

बस्तर में माओवादी स्मारकों पर चल रहा साय-शाह का बुलडोजर, एक वर्ष में 70 से अधिक ध्वस्त

बस्तर के जंगलों और दूरस्थ गांवों में कभी माओवादी वर्चस्व के प्रतीक रहे माओवादी नेताओं के स्मारक अब ढहते इतिहास बन रहे हैं। बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने छह माओवादी स्मारकों को गिराया।

एक वर्ष के भीतर अब तक 70 से अधिक ऐसे ढांचे ध्वस्त किए जा चुके हैं, जिनमें पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति स्तर के माओवादियों के नाम अंकित स्मारक भी शामिल हैं। यह कार्रवाई केवल ईंट-पत्थर तोड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि उस वैचारिक और मनोवैज्ञानिक पकड़ को तोड़ने का संकेत है, जिसने वर्षों तक क्षेत्र में भय और प्रभुत्व बनाए रखा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्च 2026 तक माओवाद उन्मूलन के लक्ष्य और राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की सख्त रणनीति के बीच यह अभियान तेज हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, बस्तर के 3900 गांवों में से कभी करीब 2800 गांव माओवादी प्रभाव में थे। सुरक्षा रिक्तता का लाभ उठाकर एक हजार से अधिक गांवों में ऐसे स्मारक खड़े किए गए थे, जिनमें से अधिकतर गांव में इन स्मारकों को हटाने की कार्रवाई की गई है और अब जिन गांवों में ऐसे स्मारक बचे हुए हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक शांति, विकास और पुनर्वास की दिशा में निर्णायक कदम है। जहां भय के प्रतीक गिर रहे हैं और कानून का शासन मजबूती से स्थापित हो रहा है।

हाल के महीनों में शीर्ष माओवादी नेताओं के स्मारक भी निशाने पर रहे। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में बनाए गए भाकपा (माओवादी) प्रमुख बसव राजू के स्मारक को 12 फरवरी को ध्वस्त किया गया। इससे पहले सालातोंग गांव में शीर्ष माओवादी रमन्ना के वर्षों पुराने विशाल स्मारक को 18 दिसंबर 2025 को गिराया गया। जनवरी 2025 में बीजापुर के भट्टीगुड़ा में पोलित ब्यूरो व केंद्रीय समिति सदस्य कट्कम सुदर्शन का स्मारक भी हटाया गया था।