अब हाईवे के किनारे दिखेंगी मधुमक्खियां, छत्तीसगढ़ के इस नेशनल हाईवे पर बनेगा देश का पहला ‘बी कॉरिडोर’

अब हाईवे के किनारे दिखेंगी मधुमक्खियां, छत्तीसगढ़ के इस नेशनल हाईवे पर बनेगा देश का पहला ‘बी कॉरिडोर’

आज के दौर में पर्यावरण संरक्षण एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है. पर्यावरण और प्रकृति का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. इसी दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक नई पहल की शुरुआत की है. NHAI का मकसद न केवल यातायात को बेहतर बनाना है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना भी है. दरअसल, NHAI ने एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत अब सड़कों और पुलों के निर्माण के साथ-साथ मधुमक्खियों और अन्य परागणकारी जीवों के संरक्षण के लिए विशेष ‘बी कॉरिडोर’ (मधुमक्खी गलियारे) बनाए जाएंगे. NHAI की इस अनूठी पहल की शुरुआत छत्तीसगढ़ राज्य से होगी.

इस नेशनल हाईवे पर बनेगा पहला ‘बी कॉरिडोर’

सबसे पहले छत्तीसगढ़ के नेशनल हाईवे-53 के आरंग–सरायपाली मार्ग पर ‘बी कॉरिडोर’ का निर्माण कर इस पहल की शुरुआत की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में नेशनल हाईवे-30 (रायपुर–धमतरी) और नेशनल हाईवे-130 (कटघोरा–पथरापाली) मार्ग पर बी कॉरिडोर बनाया जाएगा. बता दें कि इस विषय के संबंध में केंद्र सरकार की तरफ से दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं.

क्या है ‘बी कॉरिडोर’?

  • अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर यह ‘बी कॉरिडोर’ क्या है. आसान शब्दों में कहें तो, यह राजमार्गों के किनारे देशी पौधों और फूलों की एक लंबी और हरी-भरी पट्टी होगी.
  • इसमें ऐसे पेड़, झाड़ियां और घास लगाई जाएंगी जो मधुमक्खियों के अनुकूल हों.
  • इन पौधों का चुनाव इस तरह किया जाएगा कि अलग-अलग मौसम में अलग-अलग फूल खिलते रहें, ताकि मधुमक्खियों को पूरे साल भोजन और अमृत मिलता रहे और उनका जीवन चक्र बना रहे.

कौन‑कौन से पेड़-पौधे लगाए जाएंगे?

  • NHAI ने ‘बी कॉरिडोर’ में देशी और स्थानीय पौधे लगाने का निर्णय लिया है.
  • इनमें नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और शिरीष जैसे पेड़-पौधे शामिल हैं.
  • इसके अलावा, फूलों वाली जंगली घास भी लगाई जाएगी. साथ ही परागणकारी जीवों के संरक्षण के लिए सूखी लकड़ी और खोखले तने भी छोड़े जाएंगे, ताकि वे इस कॉरिडोर में अपना सुरक्षित निवास बना सकें.

‘बी कॉरिडोर’ का निर्माण कैसे होगा?

NHAI के अनुसार, ‘बी कॉरिडोर’ का निर्माण उपयुक्त हाईवे खंडों और NHAI की खाली पड़ी जमीनों पर किया जाएगा. राजमार्गों के किनारे हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी पर फूलों वाले पौधे लगाए जाएंगे. इस दूरी को मधुमक्खियों की भोजन खोजने की औसत क्षमता को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है.

2026–27 में बनेंगे तीन बी कॉरिडोर

NHAI के क्षेत्रीय कार्यालयों ने साल 2026-27 तक कम से कम तीन ‘बी कॉरिडोर’ तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसी समय के दौरान पूरे देश में लगभग 40 लाख पेड़ लगाए जाएंगे, जिनमें से 60 प्रतिशत से ज्यादा पेड़ इसी ‘बी कॉरिडोर’ योजना का हिस्सा होंगे. खास तौर पर छत्तीसगढ़ में इस पहल के तहत करीब दो लाख पौधे लगाने की तैयारी की गई है.