मजदूरों के हक में गूंजा न्याय, RCWF ने सेंट्रल ट्रिब्यूनल में जीती दो बड़ी कानूनी लड़ाइयाँ,
चिरमिरी कोलियरी के श्रमिकों को मिलेगा 6% ब्याज के साथ एरियर और पदोन्नति का लाभ
कोरबा//चिरमिरी। राष्ट्रीय कालरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) ने श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए केंद्रीय औद्योगिक अधिकरण (Central Industrial Tribunal) से दो महत्वपूर्ण मामलों में ऐतिहासिक जीत हासिल की है । ट्रिब्यूनल ने प्रबंधन की गलतियों को सुधारते हुए श्रमिकों के पक्ष में फैसला सुनाया है और उन्हें बकाया राशि पर 6% ब्याज भुगतान करने का आदेश दिया है ।
प्रमुख मामले और ट्रिब्यूनल का फैसला
01. मोहम्मद जमील:- 32 साल बाद मिला ऑफिशिएटिंग अलाउंस का हक
पृष्ठभूमि:-मोहम्मद जमील की नियुक्ति 1994 में कैटेगरी -1 में हुई थी, लेकिन उनसे क्लर्क ग्रेड का POL इश्यूअर कार्य लिया गया । प्रबंधन ने लंबे समय तक उन्हें उचित भत्ता नहीं दिया और मांग करने पर उनका स्थानांतरण कर दिया गया ।
फैसला:- ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह माना कि मो. जमील ऑफिशिएटिंग अलाउंस के हकदार हैं कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन्हें पूरी कार्य अवधि का भत्ता 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान किया जाए ।
02. जे.पी. वर्मा:- 39 साल पुराने 'कैडर स्कीम' विवाद पर जीत
पृष्ठभूमि: फार्मासिस्ट जे.पी. वर्मा के मामले में प्रबंधन की प्रशासनिक देरी (कैडर स्कीम 1987 को चिरमिरी एरिया में 1989 में लागू करना) की वजह से उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई थी जिससे वे पदोन्नति में पिछड़ गए थे ।
फैसला:- ट्रिब्यूनल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आदेश दिया कि वर्मा को पिछली तारीखों से सभी पदोन्नतियों का लाभ दिया जाए और उनके वेतन का पुन: निर्धारण कर 6% ब्याज सहित एरियर का भुगतान किया जाए ।
यूनियन की प्रतिबद्धता
RCWF के महामंत्री प्रो. भागवत प्रसाद दुबे ने स्वयं इन मामलों में स्टेटमेंट ऑफ क्लेम तैयार किया और पैरवी की जीत पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा:- यह केवल दो श्रमिकों की जीत नहीं है बल्कि उन सभी कामगारों की जीत है जो प्रबंधन की विसंगतियों के कारण अपने हक से वंचित रह जाते हैं । चूँकि प्रबंधन के साथ वार्ता प्रणाली (IR System) फिलहाल बाधित है इसलिए यूनियन पूरी ताकत के साथ कन्सीलिएशन मशीनरी और ट्रिब्यूनल के माध्यम से लड़ाई लड़ रही है ।
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