नशे के 'सल्तनत' का अंत, चिरमिरी पुलिस ने ढहाया रसल एक्का का अंतर्राज्यीय ड्रग्स साम्राज्य,
हैदराबाद से सप्लाई, गोवा में अय्याशी और सरगुजा में ज़हर: मास्टरमाइंड रसल समेत पूरा गिरोह सलाखों के पीछे,
चिरमिरी। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में मौत का सामान बेचने वाले सबसे बड़े सिंडिकेट का चिरमिरी पुलिस ने अंत कर दिया है। आईजी दीपक झा और एसपी रत्ना सिंह के "नशा मुक्त अभियान" के तहत पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को बेनकाब किया है जिसके तार छत्तीसगढ़ से निकलकर तेलंगाना और झारखंड तक फैले थे। इस पूरे नेटवर्क का 'किंगपिन' रसल एक्का अब पुलिस की गिरफ्त में है।
रायपुर से हैदराबाद तक पुलिस की दबिश
इस पूरी जांच की शुरुआत 7 अक्टूबर को हुई, जब चिरमिरी पुलिस ने एक पुख्ता सूचना पर शेख अल्ताफ और किशन रजक को दबोचा। इनके पास से नशीली इंजेक्शन बरामद हुए। पूछताछ में जब शुभम यादव का नाम आया, तो पुलिस को समझ आ गया कि यह कोई गली-मोहल्ले का गैंग नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है।
थाना प्रभारी विजय सिंह के नेतृत्व में बनी स्पेशल टीम ने मोबाइल लोकेशन और सीडीआर के आधार पर जाल बिछाया। मुख्य आरोपी रसल एक्का को रायपुर से घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया, जबकि गिरोह के 'फाइनेंस हैंडलर' वैंदला वासु को पकड़ने के लिए पुलिस की एक टीम सीधे हैदराबाद के पर्वत नगर (बोराबंदा) जा धमकी।
ज़हर की कमाई और 5 लाख की 'गोवा ट्रिप'
पुलिस की इन्वेस्टिगेशन स्टोरी में रसल एक्का का किरदार किसी शातिर अपराधी जैसा है। रसल केवल ड्रग्स बेचता नहीं था, बल्कि वह इस काली कमाई को पानी की तरह बहाता था।
लग्जरी और अय्याशी:
हाल ही में रसल अपनी गर्लफ्रेंड के साथ गोवा की सैर पर था, जहाँ उसने 5 लाख रुपये महज कुछ दिनों में उड़ा दिए।
शातिर 'मनी ट्रेल':
रसल इतना चालाक था कि वह पुलिस को चकमा देने के लिए कभी अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करता था। वह नशे के पैसे सहयोगियों के खातों में डलवाता था।
पुरानी हिस्ट्री:
रसल के खिलाफ मनेंद्रगढ़, अंबिकापुर और पोड़ी थानों में पहले से ही गंभीर अपराध दर्ज हैं।
गढ़वा-हैदराबाद' नेक्सस का पर्दाफाश
जांच में खुलासा हुआ कि रसल के गुर्गे गढ़वा (झारखंड) से यात्री बसों में छिपकर नशे की खेप लाते थे। वहीं, हैदराबाद का वैंदला वासु और सूरजपुर का रजत कुमार इस पूरे खेल के बैकएंड ऑपरेशंस और पैसे के लेनदेन को संभालते थे।
अभी और भी चेहरे बेनकाब होंगे
थाना प्रभारी विजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआत है। रसल से पूछताछ में कई नए सुराग मिले हैं। आशंका है कि सरगुजा संभाग के कई और 'सफेदपोश' लोग इस कारोबार को संरक्षण दे रहे थे, जिनकी गिरफ्तारी के लिए साइबर सेल लगातार डेटा खंगाल रही है।
जांबाज टीम का योगदान
इस बड़ी सफलता में थाना प्रभारी विजय सिंह, सहायक उप निरीक्षक नईम खान, प्रधान आरक्षक साइबर सेल पुष्कल सिंह, आरक्षक संजय कांत, जितेंद्र ठाकुर, साइबर सेल के राकेश तिवारी और सैनिक प्रमोद साहु की भूमिका बेमिसाल रही।
चिरमिरी पुलिस की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है। सभी आरोपियों को न्यायालय के आदेश पर जिला जेल बैकुंठपुर भेज दिया गया है।
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