रायपुर : लकड़ी पर उकेरे सपने, मेहनत से बनीं लखपति दीदी 

रायपुर : लकड़ी पर उकेरे सपने, मेहनत से बनीं लखपति दीदी 

 बस्तर की कला को दिलाई नई पहचान

रायपुर, 4 जून 2026
बस्तर की पारंपरिक काष्ठकला को देशभर में पहचान दिलाने वाली बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के ग्राम कोहकापाल की श्रीमती इंदुमती राणा आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बन चुकी हैं। कभी परिवार तक सीमित रहने वाली इंदुमती ने अपनी मेहनत, कौशल और सरकारी योजनाओं के सहयोग से न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि लखपति दीदी के रूप में अपनी अलग पहचान भी बनाई है।
सुशासन तिहार 2026 के तहत उलनार में आयोजित समाधान शिविर में इंदुमती ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उनके पति वर्षों से काष्ठकला के क्षेत्र में कार्यरत हैं। पति की कला और समर्पण से प्रेरित होकर उन्होंने भी लकड़ी पर बस्तर की पारंपरिक आकृतियों और सांस्कृतिक प्रतीकों को उकेरना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने इस शिल्प में दक्षता हासिल कर इसे आजीविका का मजबूत साधन बना लिया।

इंदुमती बताती हैं कि उनकी सफलता की यात्रा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत संचालित बिहान समूह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विपणन संबंधी मार्गदर्शन मिला। इससे उनके उत्पादों के निर्माण का दायरा बढ़ा और उन्हें व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला।

उनकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। इंदुमती को दिल्ली, भोपाल और रायपुर में आयोजित विभिन्न शिल्प प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला। इसके अलावा उन्होंने देश के प्रतिष्ठित सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में भी भाग लिया, जहां बस्तर की पारंपरिक काष्ठकला को देश-विदेश के कला प्रेमियों ने खूब सराहा। इन आयोजनों से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी के रूप में बनी है।
आज इंदुमती न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही हैं।