बलरामपुर/शंकरगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग शंकरगढ़ द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शासन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए E-KYC जैसे तकनीकी कार्य के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है तथा मानदेय कटौती की चेतावनी देकर दबाव बनाया जा रहा है।
जारी नोटिस में महतारी वंदन योजना अंतर्गत लंबित E-KYC को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं,साथ ही कार्य पूर्ण नहीं होने की स्थिति में मानदेय कटौती एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि शासन स्तर पर E-KYC कार्य को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से कराए जाने संबंधी निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए नोटिस जारी किया जाना गैर-विधिक और मानसिक दबाव बनाने वाला कदम माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विभागीय आदेशों और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के विपरीत जाकर परियोजना स्तर पर इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है, जिससे कार्यकर्ताओं में भय और असुरक्षा का वातावरण बन रहा है। उनका कहना है कि लगातार नोटिस और मानदेय कटौती की चेतावनी से कार्यकर्ता स्वयं को मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, यदि किसी कार्य के लिए अलग एजेंसी अथवा तकनीकी व्यवस्था शासन द्वारा निर्धारित है तो उसकी जवाबदेही सीधे मैदानी कर्मचारियों पर डालना उचित नहीं माना जा सकता।
परियोजना अधिकारी का कहना है कि नोटिस सिर्फ धमकाने के लिए नहीं काटा जायेगा किसी का मानदेय
इस मामले में परियोजना अधिकारी राहुल सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि “किसी भी कार्यकर्ता का मानदेय काटा नहीं जाएगा। केवल नोटिस जारी किया गया है ताकि लंबित कार्य समय पर पूर्ण कराया जा सके। इसका उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं बल्कि समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराना है।”
हालांकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि मानदेय कटौती का उद्देश्य नहीं था तो नोटिस में ऐसी चेतावनी का उल्लेख क्यों किया गया और क्या कार्य पूर्ण कराने के लिए भय का वातावरण बनाना उचित प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जा सकती है।



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