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भारत में न्याय की प्राप्ति, न्याय की इच्छा और न्याय पाने वालों की संख्या निरन्तर बढ़ी है। इसलिए प्रामाणिक विधिवेत्ताओं की निरन्तर मांग भी बढ़ी है।

भारत में न्याय की प्राप्ति, न्याय की इच्छा और न्याय पाने वालों की संख्या निरन्तर बढ़ी है। इसलिए प्रामाणिक विधिवेत्ताओं की निरन्तर मांग भी बढ़ी है।

इसकी पूर्ति विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे विधि छात्रों को पूरा करना है। यह बात उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित ने विधान भवन स्थित राजर्षि पुरुषोत्तत टण्डन हॉल में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विधि के छात्रों को संबोधित करते हुए कही।

श्री दीक्षित ने प्रशिक्षुओं को विधान सभा में संपन्न किये जाने वाले विधायन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधान सभा में कानून निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य निष्पादित किया जाता है। सरकार द्वारा विधेयक जाए जाते हैं। इन विधेयकों में उद्देश्य एवं कारणों में कानून बनाने की इच्छा एवं औचित्य को दर्शाया जाता है। इस पर विधान सभा में गंभीर चर्चा होती है। तदोपरांत विधेयक पास होने के बाद श्री राज्यपाल एवं श्री राष्ट्रपति जी को हस्ताक्षर हेतु भेजा जाता है। उनके हस्ताक्षर के उपरान्त विधेयक कानून का रूप ले लेता है। उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि विधान सभा लोक सभा द्वारा बनाया गया कोई भी कानून निरस्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए संविधान में व्यवस्था की गयी है। विधायिका द्वारा बनाया गया कोई भी कानून तब तक शून्य नहीं किया जा सकता जब तक उसमें मौलिक अधिकारों का हनन न होता हो। श्री दीक्षित ने विधि छात्रों को संविधान सभा में विभिन्न विषयों पर हुई चर्चाओं के बारे में पढ़ने का सुझाव दिया।

उत्तर प्रदेश के मा0 अध्यक्ष विधान सभा श्री हृदय नारयण दीक्षित जी ने न्याय के प्रशिक्षु छात्र/छात्राओं को आर्शिवचन देते हुए, इस अवसर पर विधान परिषद के प्रमुख सचिव व प्रमुख सचिव विधान सभा के साथ ही अन्य अधिकारी कर्मचारी गण।

संविधान सभा में प्रत्येक विषय पर गंभीर चर्चा हुई है। विधि छात्रों को ज्ञानवर्धन के लिए अवश्य पढ़ना चाहिए। जम्मू कश्मीर के बारे में संविधान के अनुच्छेद 370 पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा न्याय की आवश्यकता बहुत प्राचीन कालखण्ड में हुई थी। जब स्टेट नहीं था। न्याय की दृष्टि से न्याय के लिए स्टेट का जन्म हुआ। विदेशी विद्वान हार्स ने अपनी किताब लेवियाथन में बताया है कि स्टेट का जन्म न्याय दिलाने के लिए हुआ है।

श्री दीक्षित ने विधि छात्रों से कहा कि उपयोगिता के आधार पर की गयी पढ़ाई निश्चित रूप से परीक्षा पास करने के लिए है । उन्होंने प्रामाणिक अधिवकत्ता एवं मार्गदर्शक बनने के साथ-साथ भारत के समग्र वैभव में अपनी योगशक्ति देने के लिए आह्वान किया।

इस अवसर पर विधान सभा के प्रमुख सचिव श्री प्रदीप कुमार दुबे तथा विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ0 राजेश सिंह, श्रीमती प्रतिमा श्रीवास्तव निबंधक, राज्य लोक सेवा अधिकरण, कॉर्डिनेटर हिमांशु शेखर पाण्डेय ने उपस्थित होकर अपने विचार प्रकट किए।

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