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जल,जंगल और ज़मीन की जंग को क़ाबू में करने की दिशा में अग्रसर हुई है भूपेश सरकार..,

जल,जंगल और  ज़मीन की जंग  को क़ाबू में करने  की दिशा में अग्रसर  हुई है भूपेश सरकार..,

नितिन राजीव सिन्हा

बस्तर के लोहंडीगुडा में राहुल गांधी ने १६ फ़रवरी २०१९ को टाटा कम्पनी के प्लांट लगाने के लिए अधिग्रहित की गई हज़ारों हेक्टेयर ज़मीन भू स्वामियों को वापस कर दी..,
इस तरह मुख्य मंत्री भूपेश बघेल ने जल,जंगल और ज़मीन की पूँजी वादी ताक़तों की तत्कालीन भाजपा सरकार के साथ मिली भगत करके की जा रही संगठित लूट को नियंत्रित करने का ठोस संदेश दे दिया है इस तरह माओवाद के सँवाहकों के हाथो से हिंसा की वजहों पर जनसमर्थन हासिल करने के कारणों पर विराम लगा दिया गया है उन्हें नैतिक और नीति गत तौर पर पीछे धकेल दिया है..,
मैं स्वयं बस्तर में जन्म ले कर जंगल की आग के ताप में तप कर बड़ा हुआ हूँ और हालिया दौर में मैंने कुछ यात्राएँ समस्या ग्रस्त जगहों की,की है मसलन जनवरी फ़रवरी २०१८ में अबूझमाड जाना हुआ और उसके सरहदी गाँव धनोरा जो घोर नक्सल प्रभावित गाँव है वहाँ राजनीतिक सभा में शामिल होने का मुझे मौक़ा मिला वहाँ तब महसूस हुआ था कि जंगलों में और पहाड़ों पर मोदी सरकार की मित्र कंपनियों का क़ब्ज़ा हो रहा था बस्तर के पहाड़ों में लोहा है सो उसकी लूट हो रही थी आदिवासी व्यथित था वह भाजपा की सरकारों से सशंकित था,वह भयभीत था इसलिये माओ वाद के प्रति उसका अनचाहा झुकाव भी था..,
कांग्रेस ने ज़मीनों की संगठित लूट की रमन सरकार की नीति पर आघात किया है इससे आदिवासी जन का भरोसा सरकार के प्रति पुनःजागृत हुआ है उम्मीद है कि इससे विघ्न संतोष पर विराम लगेगा नक्सलवाद दम तोड़ेगा और जन सरोकार सरकार की नीतियों के प्रति समर्पित हो सकेगा..,जिस पर लिखना होगा कि-

गिरेगी कल
भी यही धूप
शबनम भी
यहीं..जमीं
थी जिनकी
वह फिर उनकी
हुई..आसमाँ भी
जब ज़मीं पर
नज़रें दौड़ाएगा
पसीने से लथपथ
इंसा पाएगा
लहू से सनी
हुई धरा पर
हरी भरी
महफ़िल सजायेगा..,
ज़मीं की कोख
ही ज़ख़्मी नही
अंधेरों से
असमां के
सीने में भी
दर्द ज़मीं के
लूट का था..,

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