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अंग्रेजों से लोहा लेने वाले गुंडाधुर जी को याद करते हुए आदिवासी छात्र संगठनों ने प्रदर्शन करके असली संघर्ष के असली मुद्दों के साथ आदिवासी एजेंडा तय किया

अंग्रेजों से लोहा लेने वाले गुंडाधुर जी को याद करते हुए आदिवासी छात्र संगठनों ने प्रदर्शन करके असली संघर्ष के असली मुद्दों के साथ आदिवासी एजेंडा तय किया

छात्र नेता योगेश कुमार ठाकुर के नेतृत्व में आज आदिवासी छात्र संगठन के द्वारा रैली (घड़ी चौक से शास्त्री चौक, शास्त्री चौक से कलेक्ट्रेट से राज्यपाल भवन चौक से नगर निगम गार्डन में समापन )निकालकर गुंडाधुर जी को याद करते हुए आदिवासी एजेंडा जारी किया गया जिसमें प्रमुख रूपसे अभय मरकाम, दिगंबर मरकाम,खमेश ठाकुर , भुनेस्वर विशाल,संजय कोर्राम,हरेश ध्रुव,पद्मावती ध्रुव, ममता ठाकुर, पल्लव उईके, कृष्णा अर्मो, परमेश्वर ध्रुव, राहुल ध्रुव, केयूर ठाकुर,गजेन्द ध्रुव,धनंजय ध्रुव एवं बड़ी संख्या में छात्र/छात्राये युवा उपस्थित थे

आदिवासी एजेंडा

असली संघर्ष के असली मुद्दे

आदिवासी-अधिकार के मामलों पर शक्ति-प्रदर्शन और अकादमिक-चर्चा के विविध कार्यक्रम अक्सर आयोजित किए जाते रहे हैं लेकिन आज भी सामाजिक संगठनों में न तो एजेंडे पर कोई स्पष्टता आ पाई है और न ही रणनीति पर। एजेंडा और रणनीति को लेकर आदिवासी समाज के अलग-अलग संगठनों में न केवल घातक मतांतर है बल्कि परस्पर सूचना-समन्वय की इच्छा-शक्ति भी नहीं दिखती।

ऎसे में परिणाम-परक कार्रवाई की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप आदिवासी छात्र संगठन, प्रामाणिक सूचना संचार और तार्किक व्याख्या सुनिश्चित करने के लिए, एक नए ढंग का उपयोगी आयोजन प्रस्तावित कर रहा है। राज्य के सभी भागों से आदिवासी कार्यकर्त्ताओं को एक साथ बिठाकर आदिवासी एजेंडा बनाने की तैयारी शुरु की जा रही है। सम-सामयिक सामाजार्थिक स्थिति को देखने के आदिवासी नज़रिए को चिन्हित और प्रकाशित करने के संरचनात्मक प्रयास की यह एक कड़ी है। कुछ प्रमुख पहलुओं पर प्रश्नावलियां संयोजित-संपादित करने से सैद्धांतिक स्पष्टता आएगी, जिसे क्रमश: पारंपरिक/सामाजिक संगठनों के विमर्श और फ़िर जनमत संग्रह के माध्यम से प्रखर बनाया जाएगा।

1. विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल (आदिवासियत-उन्मुख) पर शासन श्वेत-पत्र जारी करे।

2. शासन छत्तीसगढ़ स्थानीयता नीति की जल्द से जल्द घोषणा करे, और कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे।

3. ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़े रोकने और आदिवासी भू-स्वामित्व सुरक्षा के लिए शासन विशेष विनियम और अधिनियम बनाए (जन-विधि द्वारा प्रस्तावित विधेयक मसौदे पर शासन अपनी स्थिति स्पष्ट करे)।

4. आदिवासी विचाराधीन बंदियों की शीघ्र सामूहिक रिहाई के लिए शासन तत्काल विधायी-कार्यपालिक कदम उठाए (जन विधि द्वारा प्रस्तावित ग्यारह सदस्यीय युवा विधिवेत्ता समूह टास्क फ़ोर्स और कोंडागांव में उच्च न्यायालय की खंडपीठ की स्थापना पर शासन अपनी स्थिति स्पष्ट करे)।

5. वनों का विस्तार-सघनीकरण एवं वास्तविक स्थानीय-समुदाय-स्वामित्व सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम के संपूरक विशेष कार्य-योजना (अधिकारियों का आदिवासियत-उन्मुखीकरण एवं सामुदायिक चेतना प्रसार के उपाय सम्मिलित) की घोषणा और अनुपालन।

6. अनुसूचित क्षेत्रों में परिवहन, थोक व्यापार आदि पर जनजातीय स्वायत्त सहकारी समितियों का एकाधिकार सुनिश्चित करने के लिए शासन शीघ्र विधायी-कार्यपालिक कदम उठाए (जन-विधि द्वारा प्रस्तावित विधेयक मसौदे पर शासन अपनी स्थिति स्पष्ट करे)।

7. नक्सली मोर्चे पर स्थायी शांति के लिए स्वायत्तता-सहकारिता-उन्मुख उपायों के लिए शासन शीघ्र विधायी-कार्यपालिक कदम उठाए (जन-विधि द्वारा प्रस्तावित विधेयक मसौदे पर शासन अपनी स्थिति स्पष्ट करे)।

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