इस संसार में न कोई राजा न कोई रंक

इस संसार में न कोई राजा न कोई रंक

लेखक (ई. मनोज कुमार सिन्हा,
बसंत विहार, जशपुरनगर)

इस संसार में न कोई राजा न कोई रंक

प्रकृति के नियम का सभी करें पालन

#इन्सानियत (मानव धर्म)

हम लोग सृष्टि के उच्च कुल मानव जाति में पूर्व कर्मों/किस्मत के आधार पर राजा, रंक, अमीर, गरीब, एवं विभिन्न जाति एवं समुदायों में स्वस्थ्य, अस्वस्थ, विकलांग इत्यादि रूप में पैदा होते हैं, इसमें किसी का कोई देन नहीं है, यह ईश्वरीय शक्ति है, जो यहाँ कि एक निश्चित उद्देश्य के लिये यहां भेजती हैं।
ईश्वर ने इस सृष्टि को चलाने के लिये मजदूर, किसान, सफाईकर्मी मैकेनिक, डाॅक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, शासक वर्ग इत्यादि हर वर्ग का विकास किया, सब एक-दूसरे के पूरक हैं शासक का भी प्रजा के बिना कोई महत्व नहीं, वही एक मजदूर के बिना भी यह सृष्टि नहीं चल सकती। यह एक प्राकृतिक देन है। हमें हमेशा एक-दूसरे के प्रति आदर भाव रखना चाहिये।
जिस प्रकार सूर्यदेव, हवा, अग्नि, पानी, प्राकृतिक वृक्ष, बिना किसी से कोई भेदभाव किये समान रूप से प्रकाश, हवा, शीतलता, प्रदान करते हैं, उसी प्रकार शासक वर्ग को भी बिना भेदभाव के समान रूप से व्यवहार करने का प्रयास करना चाहिए।
प्रकृति के इस नियम से हम लोगों को भी सीख लेनी चाहिए कि अपने स्वार्थवश लड़ाई न कर आपस में मानव जाति के उत्थान के किये कोशिश करें, आज सब लोग अपने स्वार्थ, जाति, वोट की राजनीति, के नाम पर एक दूसरे को लड़ाकर इंसानियत (मानव धर्म) को कलंकित कर रहे हंै।
हमारी हिन्दु संस्कृति बहुत पुरानी और आध्यात्म का अखण्ड भण्डार लिये हुए है। हम देवी, देवताओं की उपासना के साथ साक्षात सूर्यदेव, नवग्रह, प्रकृति रूपी वृक्ष (बरगद, तुलसी, नीम, पीपल, केला, साल) वायु, अग्नि, पृथ्वी इत्यादि को पूजते हैं। हमारे आध्यात्मिक शक्ति के बल पर ही यह भारतवर्ष विभिन्न धर्म, जाति, संघर्ष, चारों तरफ लूटने की प्रवृति होने के बाद भी निरन्तर आगे बढ़ रहा है हमें अपने आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाना है आज हमारे आध्यात्म को समझने के लिए विदेशी लोग हमारे भारत आ रहे हैं पर हम यहाँ अपने आध्यात्म से अछूते हैं।
हमारा धर्म है कि हम अपने अन्दर इंसानियत जिन्दा रखते हुये अपने आय का सामथ्र्य अनुरूप कुछ राशि खर्च कर कमजोर लोगों/जरूरतमंद लोगों को बिना किसी अपेक्षा के साथ मानसिक/शारीरिक सहयोग प्रदान करना चाहिये। जिस किसी के पास जो भी जिस भाव से आये यथायोग्य सहयोग प्रदान करें। इसके अलावा प्रकृति में घूम रहे लावारिस पशु, चहचहाते पक्षियों के प्रति भी स्नेह बनाये उनकी सेवा करें।
इस संसार में ईश्वर ने कभी किसी को सम्पूर्ण रूप से सुखी नहीं बनाया है, किसी को पैसे की कमी किसी को बिमारी, किसी को संतान का तकलीफ, गृह क्लेश जैसे नाना तरह का कष्ट देकर भेजा है हमें हर हाल में ईश्वर की अराधना करते हुये, आगे बढ़ना है और मानव धर्म (इंसानियत) का पालन करना है जिससे देश और इस सृष्टि का विकास हो।
हम सभी अच्छी तरह जानते हंै कि संसार के नियम के अनुरूप हमें एक दिन यहाँ से जाना है तो व्यर्थ में लड़ाई में समय क्यों बर्बाद करें। आप स्वयं खुश रहें और औरों के खुशी का कारण बनें, लोगों से अधिक से अधिक दुआ लेने का प्रयास करना चाहिये, न कि बद्दुआ।

(मनोज कुमार सिन्हा)
बसंत विहार, जशपुरनगर

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2 comments

  1. Jayanti sinha
    April 16th, 2018 11:32

    Motivational writIng…. Must be appreciated

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  2. सुनील सिन्हा ।
    June 16th, 2018 8:18

    बात तो सोलह आने खरी है लेकिन हम मानव जाति तो हैं और और मानव जाति की यह खासियत है या खराबी बोले ,ये मौसम से भी ज्यादा और उम्मीद से भी ज्यादा बदलने मे देर नहीं करता, इस लिए ये ईश्वर का ही देन है कि मानव जाति उन्नति कि ओर बढते रहता है और जहां उन्नति है वहां अवनति भी साथ रहना ही है ।अतः हमलोग कितना भी लोगों को समझाने कि कोशिश करे अब उनके समझ से परे होगा ।लेकिन इसका मतलब ये कतई नही के हम अच्छे प्रयास न करे ।
    अतः आपका लेख अच्छा लगा इसी तरह लिखते रहिए ।

    धन्यवाद ।

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