दोना-पत्तल निर्माण से शुरू किया सफर, आज चार सफल व्यवसायों का कर रही हैं संचालन
रायपुर, 12 जून 2026। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित ‘लखपति दीदी’ अभियान ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम तलवापारा की निवासी कांति साहू हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने साहस, मेहनत और संकल्प के बल पर सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ है।
एक साधारण कृषक परिवार से आने वाली कांति साहू लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सपनों के आड़े आ रही थी। लगभग तीन वर्ष पहले वे गांव की महिलाओं के साथ शारदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, वित्तीय प्रबंधन और व्यवसाय संचालन की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता बनी सफलता की सीढ़ी
बिहान योजना के अंतर्गत बैंक लिंकेज, एसवीईपी (SVEP) योजना और मुद्रा ऋण के माध्यम से कांति साहू को लगभग 4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता ने उन्हें स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर दिया।
एक साथ शुरू किए चार व्यवसाय
कांति साहू ने किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय विविध व्यवसायों को अपनाया। उन्होंने दोना-पत्तल निर्माण इकाई, धान कृषि बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर (कपड़ा व्यवसाय) और सिलाई केंद्र की शुरुआत की। इन सभी व्यवसायों को उन्होंने मेहनत और लगन से आगे बढ़ाया।
कांति बताती हैं कि उनके इस सफर में उनके पति महेन्द्र साहू का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शुरुआती संघर्षों और चुनौतियों का सामना दोनों ने मिलकर किया, जिसका परिणाम आज सफलता के रूप में सामने है।
हर महीने 35 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ
वर्तमान में कांति साहू के व्यवसायों का मासिक कारोबार 1 से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। इससे उन्हें प्रतिमाह 30 से 35 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। उनकी वार्षिक शुद्ध आय 3 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जिसके चलते वे आधिकारिक रूप से ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ कांति साहू का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
कांति साहू की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल भी कायम कर सकती हैं।




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