कर्तव्य पथ से सम्मानजनक विदाई: 40 वर्षों की बेमिसाल सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए प्रधान पाठक श्री तेलेस्फोर कुजूर
नकबार, छत्तीसगढ़ | दिनांक: 28 फरवरी 2026
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, नकबार में आज एक गरिमामयी विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जहाँ विद्यालय के लोकप्रिय प्रधान पाठक श्री तेलेस्फोर कुजूर को उनकी लंबी और निष्कलंक सेवा के पश्चात सेवानिवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में सम्मान, कृतज्ञता और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

श्रीफल, शाल और विशेष उपहारों से सम्मान
समारोह के दौरान शालेय परिवार की ओर से श्री तेलेस्फोर कुजूर जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें श्रीफल और शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। उनकी सेवाओं को याद करते हुए छात्रावास की ओर से भी उन्हें शाल और श्रीफल देकर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
एक भावुक और प्रेरक पहल करते हुए, श्री कुजूर सर ने विद्यालय के प्रति अपने प्रेम स्वरूप स्कूल को चांदनी (स्मृति चिह्न/उपहार) भेंट की, जिसे शालेय परिवार ने उनकी अमिट याद के रूप में स्वीकार किया।

जीवन संगिनी की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह की गरिमा तब और बढ़ गई जब इस विशेष पल के साक्षी बनने के लिए श्री कुजूर की धर्मपत्नी भी उनके साथ उपस्थित रहीं। विद्यालय परिवार और ग्रामीणों द्वारा दोनों का आदरपूर्वक अभिनंदन किया गया और उनके सुखद, समृद्ध एवं स्वस्थ भविष्य की मंगल कामना की गई।
शिक्षा के क्षेत्र में बेमिसाल रहा 40 वर्षों का सफर
श्री कुजूर के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने उनके अनुशासित और समर्पित करियर की प्रशंसा की:
* जन्म एवं शिक्षा: उनका जन्म 22 फरवरी 1964 को ग्राम बासेन में हुआ। शिक्षा जनता मिडिल स्कूल बासेन, लोयोला कुनकुरी और अंबिकापुर में संपन्न हुई।
* प्रथम नियुक्ति: 4 अक्टूबर 1986 को प्राथमिक शाला रजोलीपारा (भैयाथान) से उनके शैक्षणिक सफर की शुरुआत हुई।
* विभिन्न सेवाएं: उन्होंने मिडिल स्कूल गेरसा (सीतापुर), कन्या आश्रम दुलदुला और माध्यमिक शाला झरगांव में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दीं।
* बहुमुखी शिक्षक: वे केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों के प्रखर शिक्षक भी रहे।
* प्रशासक के रूप में: उन्होंने बालक छात्रावास रौनी में अधीक्षक के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
* अंतिम पड़ाव: मई 2013 से वर्तमान तक उन्होंने माध्यमिक शाला नकबार में प्रधान पाठक के रूप में अपनी विशिष्ट कार्यशैली से एक नई पहचान बनाई।
ग्रामीणों और अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में हाई स्कूल नकबार के प्राचार्य श्री एस.पी. तिग्गा, सहायक प्राचार्य श्री पैकरा जी, समस्त शिक्षकगण, श्रीमती यादव मैडम, श्रीमती कुजूर मैडम और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे। विशेष रूप से क्षेत्र के ग्रामीण भी इस विदाई समारोह में शामिल हुए, जो श्री कुजूर की जनमानस में लोकप्रियता को दर्शाता है। वक्ताओं ने कहा कि श्री कुजूर के मार्गदर्शन में न जाने कितनी पीढ़ियों का भविष्य संवरा है।
काव्यात्मक विदाई
समारोह के अंत में भावुक पंक्तियों के साथ उन्हें विदा किया गया:
> "कल न हम होंगे न कोई गिला होगा, सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा...
> जो लम्हें हैं हँस के बिता लें, जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।"













