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मोदी के तिलिस्म को नकारा गड़करी ने..?

मोदी के तिलिस्म को नकारा गड़करी ने..?

नितिन गड़करी ने कह दिया है कि भाजपा विचार धारा की पार्टी है यह व्यक्ति केंद्रित क़तई नहीं है न यह अटल,आडवाणी की थी और नहीं मोदी शाह की व्यक्तिगत जागीर है..,
मतलब मोदी के महिमावादी मायाजाल से दरकिनार होने के संकेत आ गये हैं मसलन २३ मई के बाद मोदी शाह के अच्छे दिन के सलामत रहने की संभावनायें धूमिल होती हुई दिखाई पड़ रही हैं..,
चुनाव के दौरान भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह बयान आना दर्शित करता है कि संगठन के स्तर पर कार्यकर्ताओं को संदेश देने के प्रयास हुए हैं कि मोदी के तिलिस्म पर केंद्रित जो राजनीति हो रही है और उससे पार्टी के कैडर में जो निराशा व्याप्त हुई है उसे दूर किया जाये ख़ासकर उत्तरप्रदेश में क़ैडर वैसा सक्रिय नहीं हुआ है जैसा पहले के चुनावों में हुआ करता था..,
भाजपा यह चुनाव मीडिया प्रबंधन के तहत कोरपोरेट स्टाइल में लड़ रही है मैदानी कार्यकर्ता उदासीन है उसके पास जनता के मूल मुद्दों पर उठने वाले सवालों के जवाब नहीं हैं राष्ट्रवाद और मोदी का चेहरा चल नहीं पा रहा है हाल यह है कि २०१४ के चुनाव में जो मोदी,मसीहा बन कर उभरे थे वे अब मामूली नेता होकर रह गये हैं इसलिये कहीं कोई लहर नहीं है..,
जिसका नुक़सान पार्टी के रणनीतिकारों को तय दिख रहा है इसलिये पाँचवें चरण के बाद जो चुनाव होने हैं वहाँ २०१४ में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी उन सीटों पर कार्यकर्ताओं के मनोबल बनाये रखने के प्रयास नितिन गड़करी के हालिया बयान के माध्यम से होते हुए दिख रहे हैं..,
२३ मई के बाद नेतृत्व को लेकर भाजपा में आत्ममंथन हो सकता है अतिवाद की मौजूदा दशा से पार्टी सम्भवत उबरना चाहती है “मोदी मोदी मोदी मोदी “ के गूँजते दो शब्दों को जिसे मोदी दुनिया का एकल एतिहासिक नारा रजत शर्मा के शो में बोल गए हैं लगता है इस आत्ममुग्ध नेता से पार्टी का नेतृत्व अब छुटकारा पाना चाह रहा है इसलिये यह बयान इस समय आया है..,

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