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-क्या,मोदी देश से बड़े हो गये हैं-!!! जो,भाजपा मुद्दा विहीन हो गई है..,

-क्या,मोदी देश से बड़े हो गये हैं-!!! जो,भाजपा मुद्दा विहीन हो गई है..,

नितिन राजीव सिन्हा की कलम से

२०१४ में निर्भया कांड,लोकपाल और अच्छे दिन आयेंगे इन मुद्दों पर चुनाव लड़े गये थे लेकिन २०१९ आते आते परिस्थिति बदल गई है चुनाव सिर्फ़ इसलिये लड़ा जा रहा है कि मोदी को प्रधान मंत्री बनाना है भाजपा ने तो कम से कम यही भ्रम फैला रखा है..,
लोकतंत्र में इस तरह की बातें सही नहीं होती है ध्यान रहे लोक के लिये तंत्र काम करता है न कि किसी व्यक्ति की सीने की चौड़ाई अथवा किसी माचो मेन के लिये लोक और तंत्र दोनों काम करते हों,ऐसी परिस्थिति त्रासदी पूर्ण हुआ करती है और भारत में लोक तंत्र इन दिनों इसी दौर से गुज़र रहा है..,
जनता के लिए कोई बात सत्ता धारी दल नहीं कर रहा है २०१४ में निर्भया कांड की कश्ती थी इन दिनों मोदी का शौर्य बनाम सेना का कौशल विकास मुद्दा बन गया है जिस पर प्रश्न तो यही उठता है कि क्या सेना इस तरहकी ब्रांडिंग के लिए तैयार है अथवा वह मोदी जैसे महा पराक्रमी के सापेक्ष अपने आत्मबल और अनुशासन को वह सुरक्षित रख पाने के लिये संघर्ष कर रही है..,
मोदी क्या चाहते हैं कि जनता,राष्ट्रवाद में उलझ कर राष्ट्र के मूल मुद्दों से नज़र फेर ले ..? क्या यही भाजपा नेतृत्व भी चाहता है,यदि हाँ तो यह समझ लेना होगा कि राष्ट्र निर्माण के दौर से सतत गुज़रता है वह लोक कल्याण की अवधारणा से परे नहीं जा सकता,इसलिये मोदी के सीने को हो सकता है कुछ अप्सराओं की निगाहों का सहारा मिल जाये लेकिन जनमत का रुझान @५६” पर हो ऐसा होना संभव नहीं दिखता है..,
मोदी से बड़ा देश है,इस बात का ध्यान रखना होगा कि देश से बड़ा मोदी नही है इसलिए चूँकि भाजपा सत्ताधारी दल है वह जनता के मुद्दे स्पष्ट करे तो ही राष्ट्रवाद का नारा कारगर हो सकता है भाजपा के चुनावी कैंपेंन से लग रहा है कि उन्हें जनता के वोट गिनती में नहीं तौल के भाव में चाहिये,यह दुर्भाग्यपूर्ण है..,मोदी की सी फ़ितरत पर अल्लामा इक़बाल ने सवाल किया है और समझाईस भी दी है कि-
जम्हूरियत इक
तर्ज़ ए हुकूमत है
कि,जिसमें बंदों
को गिना करते
हैं,तौला नहीं
करते..,

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