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खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण, आवास एवं पर्यावरण, परिवहन एवं वन विभाग के लिए 4469 करोड़ 54 लाख 45 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनि मत से पारित

खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण, आवास एवं पर्यावरण, परिवहन एवं वन विभाग के लिए 4469 करोड़ 54 लाख 45 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनि मत से पारित

मंत्री श्री अकबर की घोषणाएं:-

प्राथमिकता राशन कार्डधारी परिवार को प्रति माह 35 किलो चावल,
अधिक सदस्यों वाले परिवारों के राशन कार्डों का युक्तियुक्तकरण
भोरमदेव टाइगर रिजर्व अब नहीं बनेगा,
लेमरू प्रोजेक्ट नहीं होगा बंद,
तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर में 60 प्रतिशत की वृद्धि,
तेंदूपत्ता संग्राहक अपनी पसंद के चरण पादुका ले सकेंगे,
ऽ कमल विहार-नगर विकास योजना-5 समाप्त,
रायपुर-कोरबा-रायगढ़-जांजगीर चांपा में प्रदूषण निवारण के लिए एक्शन प्लान
रायपुर, 21 फरवरी 2019/ खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण, आवास एवं पर्यावरण, परिवहन एवं वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने आज विधानसभा में 4469 करोड़ 54 लाख 45 हजार रूपए की अनुदान मांगें प्रस्तुत की, जिसे सदन में सदस्यों द्वारा ध्वनि मत से पारित किया गया। इनमें खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग के लिए 2745 करोड़ 45 लाख 90 हजार रूपए, आवास एवं पर्यावरण विभाग के लिए 565 करोड 95 लाख 30 हजार रूपए, परिवहन विभाग के लिए 73 करोड़ 07 लाख 26 हजार रूपए और वन विभाग के लिए 1085 करोड़ 05 लाख 99 हजार रूपए के प्रावधान शामिल हैं।
श्री अकबर ने सदन में अनुदान मांगों पर चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्राथमिकता राशन कार्डधारी परिवारों को प्रति माह 35 किलो चावल दिया जाएगा। साथ ही अधिक सदस्यों वाले परिवारों के राशन कार्डों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। इस निर्णय के क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए चार हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 2500 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की गई है, जिसके तहत 15 लाख 71 हजार किसानों से 80 लाख 37 हजार टन धान की खरीदी की गई है, जिन्हें 20 हजार 92 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक निर्णय है कि देश में पहली बार किसानों से सबसे अधिक कीमत पर धान खरीदी की जा रही है। इसके लिए आगामी वित्तीय वर्ष में 900 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के उचित मूल्य दुकानों के कम्प्यूटरीकरण के लिए 29 करोड़ 80 लाख रूपए, उचित मूल्य दुकानों को आर्थिक सहायता के लिए 50 करोड़ रूपए, पहुंच विहीन दुकानों में अग्रिम भण्डारण के लिए ढाई करोड़ रूपए, शक्कर के लिए 100 करोड़ रूपए, भण्डारण क्षमता विकास के लिए 10 करोड़ 50 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए श्री मोहम्मद अकबर ने घोषणा की कि रायपुर विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण योजना नगर विकास योजना- 4 (कमल विहार) के अनुभव बहुत अच्छे नहीं होने से राज्य सरकार ने नगर विकास योजना-5 जिसमें 6 गांव सम्मिलित थे, को भू-स्वामियों के हित में समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिनकी भूमि ली गई है, उन प्रभावित भू-स्वामियों को नियमानुसार 35 प्रतिशत भूमि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष महोदय के निर्देशों के अनुरूप विधायक काॅलोनी के सड़क मार्ग में सुधार के लिए स्थल निरीक्षण किया जाएगा और जो भी बेहतर विकल्प होगा, उस पर काम किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए श्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि रायपुर-कोरबा-रायगढ़-जांजगीर चांपा में प्रदूषण की जांच के लिए आईआईटी मुंबई एवं आईआईटी खड़गपुर के द्वारा परीक्षण किया गया था। उनके प्रतिवेदन के आधार पर एक्शन प्लान बनाया गया है, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय जल संसाधन प्रबोधन कार्यक्रम (मीनार्स) के तहत प्रमुख प्राकृतिक जल स्त्रोतों पर निगरानी की जा रही है। इस कार्यक्रम में प्रदेश की मुख्य नदियां-महानदी, शिवनाथ, खारून, अरपा, हसदेव, केलो, शंखनी-डंकनी, मांड, इंद्रावती नदियां शामिल हैं। इसी तरह राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता प्रबोधन कार्यक्रम (एनएक्यूएम) के तहत प्रदेश के चार प्रमुख शहरों रायपुर, कोरबा, बिलासपुर एवं दुर्ग-भिलाई में माॅनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एकीकृत उप नगर की स्थापना हेतु नीति बनाई गई है, जिसके लिए रायपुर में 10 हेक्टेयर, अटलनगर में 30 हेक्टेयर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई के लिए 8 हेक्टेयर तथा अन्य विशेष निवेश क्षेत्र के लिए न्यूनतम 5 हेक्टेयर भूमि का क्षेत्र रखा गया है।
श्री अकबर ने वन विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा में घोषणा की कि अब भोरमदेव टाइगर रिजर्व नहीं बनेगा। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर बताया कि कोरबा जिले में लेमरू प्रोजेक्ट बंद नहीं किया गया है। साथ ही कटरा रेस्ट हाउस को बेहतर करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को अब प्रति मानक बोरा 2500 रूपए के बदले चार हजार रूपए संग्रहण पारिश्रमिक दिया जाएगा, जो गत वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक है। इससे लगभग 12 लाख 50 हजार वनवासी लाभान्वित होंगे। श्री अकबर ने बताया कि चरण पादुका योजना बंद नहीं की गई है। अब तेंदूपत्ता संग्राहक को उनके संग्रहण दर की पूर्ण राशि प्रदान की जाएगी, उससे वे अपनी पसंद के चरणपादुका खरीद सकेंगे। बजट में लघु वनोपज संग्रहण कार्य के लिए 50 करोड़ 98 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।
राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बारी’ विकास योजना के अंतर्गत वन क्षेत्रों में नरवा योजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस योजना के तहत कैम्पा मद से वन क्षेत्रों के नदी नालों का रिज टू वैली आधार पर चयन कर उनमें वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वन्य प्राणी द्वारा की जाने वाली जनहानि के बदले दी गई आर्थिक सहायता में बढ़ोत्तरी की गई है। ऐसे प्रकरणों में मृत्यु होने पर चार लाख से बढ़ाकर 6 लाख रूपए, स्थाई अपंग होने पर 2 लाख रूपए, घायल होने पर इलाज के लिए अधिकतम 69 हजार 100 रूपए और मवेशियों के मारे जाने पर 30 हजार रूपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में हरियाली प्रसार योजना के लिए 53 करोड़ रूपए, मुख्यमंत्री बाड़ी बांस योजना के लिए 12 करोड़ रूपए, वृक्षारोपण कार्यों केे लिए बड़े पौधे (टाॅल प्लांट 2-3 वर्षों के) के लिए 20 करोड़ रूपए प्रावधानित किए गए हैं। इसी तरह राज्य की संयुक्त वन प्रबंधन का प्रशिक्षण एवं रोजगारमूलक कार्य हेतु 694.55 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही समस्त वृक्षारोपणों का जीआईएस पद्धति से अनुश्रवण एवं मूल्यांकन के लिए एक डेशबोर्ड तैयार किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक वृक्षारोपण की रियल टाइम की जानकारी प्राप्त होगी। इस हेतु 150 लाख रूपए प्रावधानित किए गए हैं।
परिवहन मंत्री ने परिवहन विभाग के अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए घोषणा की कि प्रदेश में पंजीकृत आॅटो रिक्शा को वर्षों से तीन-तीन माह के लिए अस्थाई परमिट जारी किया जा रहा था। वाहन स्वामी की इस कठिनाई को ध्यान में रखते हुए अब पांच वर्षों के लिए स्थाई परमिट देने की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि केन्द्र शासन के सहयोग से राज्य में ड्रायविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित करने की योजना है, जिसके लिए केन्द्र शासन से 17 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।
अनुदान मांगों पर चर्चा में सर्वश्री सौरभ सिंह, बृहस्पति सिंह, अजय चन्द्राकर, देवव्रत सिंह, केशव चन्द्रा, रेखचंद जैन, प्रमोद शर्मा, विकास उपाध्याय, विक्रम मंडावी, धरमजीत सिंह, नारायण चंदेल, डाॅ. रेणु जोगी, श्रीमती इंदु बंजारे, श्रीमती छन्नी चंदू साहू और श्रीमती ममता चंद्राकर ने हिस्सा लिया।

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