रमन सिंह की खौफनाक भूमिका और राजनैतिक षड़यंत्र का खुलासा

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मंतूराम पवार के बयान में हुआ है कि 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी के नाम वापसी के पीछे ’’पैसे की ताकत और कांग्रेस नेताओं की झीरम घाटी में 25 मई 2013 को हुई नृशंस हत्या का वह संदर्भ भी था जिसकी पुनर्रावृत्ति रमन सिंह के तीसरे कार्यकाल में संभव था...,

मंतूराम पवार ने कोर्ट के सामने 164 के तहत दिए गए अपने बयान में कहा है कि तत्कालिन पुलिस अधीक्षक कांकेर राजेन्द्र नारायण दास ने उन्हें कहा था कि जैसा कहा जा रहा है वैसा ही करो अन्यथा झीरम की तरह कुचल दिए जाओगे ...,

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इसी संदर्भ में रमन सिंह जो कि तब यूएस में थे उन्होंने फोन पर वैसा करने पर अपना आशिर्वाद देने की बातें की थी जैसा न किये जाने पर झीरम पार्ट 2 करवा देने की धमकी रमन सिंह की सरकार में कांकेर के एसपी दास, मंतूराम से कह रह थे ...,

लिखने का तात्पर्य यह कि क्या झीरम में 2013 में हुई सुरक्षा में चूक जो कि रमन सिंह ने स्वीकारा था वह पूर्व नियोजित थी और अंतागढ़ में इसकी पुनर्रावृत्ति 2014 में हो सकती थी यदि मंतूराम अपना नाम भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वापस लेकर रमन सिंह का  आशिर्वाद प्राप्त न कर लेते ...,

रमन सिंह को अब देष की जनता को जवाब देना होगा कि झीरम घाटी कांड 2013 के घटित होने के पीछे के उद्देश्य  राजनैतिक थे या रणनीतिक ...?

रणनीतिक इसलिए कि रक्तिय क्रांति की आड़ में रमन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी एवं अन्य के साथ मिलकर कुछ ऐसा कर रहे थे जो लोकतंत्रीय मूल्यों को तहस-नहस कर देता है ...,

खैर, मंतूराम के बयान पर कानून अपना काम करेगा, कुछ अनपेक्षित गिरफ्तारियां होंगी और झीरम कांड के विभत्स प्रयोजन के कुछ खुलासे आने वाले दिनों में होंगे ...,

 

 

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