विधायक डॉ. विनय के पहल पर संविदाकर्मियों के वेतनमान में हुई 12% की वृद्धि

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"अफ़सर अली"

                               कृषि और आदिम जाति विभाग के कर्मचारियों को भी उचित वेतनमान दिलाने विधायक ने संचालक के समक्ष रखी बात 

चिरमिरी। मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ. विनय जायसवाल ने कुछ दिनों पूर्व छत्तीसगढ़ के संयुक्त सचिव वित्त विभाग को पत्र लिखकर संविदाकर्मियों का वेतनमान पुनरीक्षित करने की मांग की थी। विधायक द्वारा लिखे पत्र का तत्काल निराकरण करते हुए वित्त विभाग ने 2 अगस्त को एक आदेश जारी किया जिसमें प्रदेश के संविदाकर्मियों के वेतनमान में 12% की वृद्धि की गई, जो कि 1 जुलाई 2019 से प्रभावशील रहेंगा ।

 

ज्ञात हो कि जिले के आदिवासी विकास विभाग में चतुर्थ श्रेणी आकस्मिकता स्थापना के पद में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा उचित वेतन ना मिलने की बात विधायक के समक्ष रखा गया था। जिसे गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र के विधायक डॉक्टर विनय जायसवाल ने संचालक आदिम जाति कल्याण विभाग से मुलाकात कर उनको अवगत करवाया कि 2014 में कार्यालय कलेक्टर (आदिवासी विकास) के द्वारा जारी पत्र के अनुसार कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी आकस्मिकता स्थापना पद में प्रथम तीन वर्ष कलेक्टर द्वारा निर्धारित दर पर ततपश्चात सेवा संतोषप्रद पाए जाने पर स्वीकृत वेतनमान 4750-7440+ ग्रेड-पे 1300 पर पदस्थ संस्था में नियमानुसार शर्तों के अधीन अस्थाई रूप से पदस्थ किया जाना था। परन्तु तीन वर्ष से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी आज तक कर्मचारियों को स्वीकृत वेतनमान के तहत भुगतान नहीं किया जा रहा है।विधायक विनय जायसवाल ने आकस्मिकता स्थापना पद में पदस्थ कर्मचारियों के वेतन विसंगतियों को दूर करने की बात कही । साथ ही इस मुद्दे से आदिम जाति कल्याण विभाग मंत्री प्रेमशाय सिंह टेकाम को भी अवगत करवाया ।

वही प्रदेश में कृषि विभाग में आत्मा योजनांतर्गत पदस्थ प्रोग्रामर और ऑपरेटर को उचित वेतनमान ना मिलने की बात से, कृषि विभाग के संचालक को अवगत कराते हुए कहा कि अधिसूचना द्वारा जारी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 की कंडिका 12 (2)(क) में प्रदप्त शक्तियों के तहत राज्य शासन के कर्मचारियों हेतु छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 लागू होने के फलस्वरूप उक्त वेतन संरचना के आधार पर एकमुश्त संविदा वेतन की दरों को पुनरीक्षित करने का निर्णय लिया गया था। ये सभी दरें 1 जुलाई 2017 से प्रभावशील होने थे। जो राज्य के सभी विभागों के प्रभावशील हो चुका है। परन्तु कृषि विभाग में आत्मा योजनांतर्गत पदस्त प्रोग्रामरो और ऑपरेटरो के वेतन में आजतक वृद्धि नही की गई है। 1 जुलाई 2017 के पूर्व भी प्रोग्रामर का वेतन 16000 रू मासिक था तथा ऑपरेटर का वेतन 12000 रु मासिक था और 1 जुलाई 2017 से नई दर लागू होने के बाद भी आज तक वेतनमान में कोई वृद्धि नही किया गया है। जबकि केंद्रीय योजन आत्मा के गाइडलाइन में भी प्रत्येक 5 वर्षों में वेतन वृद्धि किये जाने का उल्लेख है। योजना के अन्य सभी पदों के वेतन में गाइडलाइन 2014 की अपेक्षा वर्ष 2018 में वृद्धि कर दी गईं है। परंतु नई गाइडलाइंन लागू होने के बाद भी प्रोग्रामर और ऑपरेटर के वेतन में कोई वृद्धि नही की गईं। 5 वर्ष पूर्व जो वेतन दिया जा रहा था वही वेतन वर्तमान में भी दिया जा रहा है। इस वेतन विसंगतियों को दूर करने की बात कृषि विभाग के संचालक से की । साथ इस मुद्दे को कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के समक्ष रखा। कृषि विभाग और आदिमजाति कल्याण विभाग के संचालकों ने विधायक विनय जायसवाल से जल्द ही इन वेतन विसंगतियों के निराकरण करने की बात कही है।

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