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रक्तदान और ज्योतिष – पंडित कान्हा शास्त्री

रक्तदान और ज्योतिष – पंडित कान्हा शास्त्री

जन्म कुंडली में मौजूद दोषों के निवारण के लिए लोग अनेक प्रकार के उपायों का सहारा लेते हैं। ताकि दोष मुक्त हों और जीवन में सुख शांति व समृद्धि का आगमन हो। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जन्म कुंडली में यदि मंगल दोष है तो उसके ऊपर चोरी, अग्रि दुर्घटना, कोई बड़ा हादसा या फिर अकाल मृत्यु का भय बना रहता है। ऐसे में मंगल दोष की शांति कराना बहुत ही आवश्यक हो जाता है। इस दोष को विविध विधानों के साथ ही रक्तदान से भी दूर किया जा सकता है।

रक्त मंगल का कारक

जिसकी कुंडली में मंगल दोष होता है, वह जीवन में चाहकर भी तरक्की नहीं कर पाता,विवाहादि में अनेक बाधाएं आती है। क्योंकि मंगल दोष उसमें आड़े आता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रक्त मंगल का कारक माना गया है। रक्त संबंधी बीमारियों में मंगल का बहुत बड़ा योगदान होता है। इसके अलावा मंगल दोष रहने पर वाहन दुर्घटना, अग्रि दुर्घटना व अन्य कोई हादसा होने से अकाल मृत्यु की संभावना बनी रहती है।

ऐसे में रक्त दान मंगल दोष से मुक्ति दिलाने में भी सहायक है। रक्तदान से रक्त का शोधन होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है, जो कि मंगल दोष के कारण कम हो जाती है। मंगल दोष की शांति का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि रक्तदान करने के कुछ ही दिनों में शरीर में मौजूद कई तरह की बीमारियां स्वयं ठीक होने लगती हैं। समय-समय पर रक्तदान करना मंगल दोष से मुक्त रहने का अचूक इलाज है।

ऐसे जातक जरूर करें रक्तदान

दान को शास्त्रों में भी महान बताया गया है। ज्योतिषशास्त्र में रक्त मंगल का कारक है। इसके दान से मंगल (भौम) ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है। जिन जातकों के लग्न में,चतुर्थ भाव,अष्टम भाव, एकादश भाव, द्वादश भाव में मंगल है उन्हें विशेष रूप से रक्त दान करना चाहिए।
शास्त्रों में हर विलक्षण वस्तु दान करने के लिए कही गई है। देह दान, नेत्र, अंग और रक्त दान का अपना महत्व है। रक्तदान करने वाले को चोरी, अग्नि समेत अन्य आकस्मिक भय नहीं सताते हैं।

साथ ही ये भी फायदे हैं-

रक्तदान करने से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। जिससे हार्ट संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है। रक्तदान ऑक्सीजन पार्लर का भी काम करता है। नए रक्त कण आने पर शरीर तरोताजा और स्वस्थ्य महसूस करता है। इसके साथ ही हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के कारण पैरालिसिस या ब्रेन हेमरेज की संभावना खत्म हो जाती है। वहीं पल्स रेट, बुखार, हेपेटाइटिस बी व सी, मलेरिया, एचआईवी, हीमोग्लोबीन, ब्लड ग्रुप की भी जांच हो जाती है।

मानवता भी जरूरी

बीमारी और दुर्घटना में समय पर सही ब्लड ग्रुप का खून न मिलने से किसी के घर का चिराग बुझता है तो किसी से माता-पिता छिन जाते हैं। कोई अपंग हो जाता है तो किसी की मानसिक स्थिति गड़बड़ा जाती है। यह दुखद स्थिति किसी भी परिवार को झकझोर कर रख देती है। ऐसे हालात न बनें इसके लिए हम सबको समाज के साथ मिलकर रक्तदान करने की पहल जरूर करनी चाहिए।

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