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कर्नाटक बना (कर-नाटक) का सबसे बड़ा मंच

कर्नाटक बना (कर-नाटक) का सबसे बड़ा मंच

(लेखक-सनत कुमार जैन)
कर्नाटक इन दिनों नाटक के मंच का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। सभी राजनीतिक दलों के नेता सामने आकर अपने अपने संवाद बोल रहे हैं। हर नेता अपने हिसाब से संविधान, बहुमत, राज्यपाल को क्या करना चाहिए, कब-कब कहां-कहां क्या-क्या हुआ है। इस सब मंचन में अपनी भूमिका अदा कर रहे है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के जो परिणाम सामने आए हैं। उसके बाद कर्नाटक की राजधानी नाटक का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। भारतीय जनता पार्टी हो, या कांग्रेस, या जनता दल एस, सभी अपनी अपनी भूमिका और अपनी बातों को बेहतर ढंग से कहकर आम जनता और राज्यपाल की भूमिका भाव-भंगिमा के साथ बड़े प्रभावी ढंग से समझाने की कोशिश कर रहे हैं। यह अलग बात है की राज्यपाल को किसका अभिनय और किसकी बात सबसे सही लगती है। उसी को कर्नाटक में सरकार बनाने का मौका मिलेगा। कर्नाटक की जनता ने चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के नाटकीय भाषण और वायदों का खूब आनंद लिया। अब सत्ता का सिंहासन किसे मिले, इसको लेकर भी कर्नाटक और देश की जनता पूरा आनंद ले रही है। इस आनंद में टेलीविजन चैनलों की भूमिका भी अति महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत के नागरिकों को सत्ता के खेल में किस तरह के खेल होते हैं। यह नाटक दिखाने का काम किया है।

224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा के 222 विधानसभा क्षेत्रों में वोट डाले गए। इस में 104 सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी जीते। 115 सीटों पर कांग्रेस और जनता दल एस के उम्मीदवार चुनाव में विजयी रहे। स्पष्ट बहुमत के लिए न्यूनतम 111 सदस्यों का होना आवश्यक है। स्पष्ट बहुमत में भारतीय जनता पार्टी के पास 8 विधायक कम हैं। वहीं कांग्रेस गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत से चार विधायक ज्यादा हैं। कांग्रेस और जदयू गठबंधन ने कर्नाटक के राज्यपाल के पास जाकर अपना दावा पेश कर दिया। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री येदिरप्पा ने भी सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। इसके बाद कर्नाटक के राज भवन में सरकार बनाने के लिए जो नाटक राजनेताओं द्वारा किया जा रहा है। उसेसारे देश की जनता देख कर मजे ले रही है।

कर्नाटक के राज्यपाल पद पर वजुभाई वाला जो कि गुजरात के पूर्व वित्त मंत्री रह चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने पिछले कुछ महीनों में अल्पमत में रहते हुए भी कई राज्यों में अपनी सरकार बना ली है। इसको देखते हुए यह आशंका सभी को थी कि मात्र 8 सीटों के कम होने पर भी राज्यपाल निश्चित रूप से भाजपा को ही सरकार बनाने का मौका देंगे। इसकी पुष्टि तब हुई, जब यह येदिरप्पा ने राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा, विधायक दल की बैठक के पूर्व ही कर दिया। इसके बाद कर्नाटक का नाटक सारे देश के टीवी चैनलों के माध्यम से आम जनता को देखने को मिल रहा है। अभी यह नाटक कितना लंबा चलेगा यह कहना मुश्किल है। दर्शकों की रुचि इस नाटक में बढ़ती ही जा रही है।
भारतीय जनता पार्टी का दावा है, कि कर्नाटक के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिली है। वह स्पष्ट बहुमत से भले कम हो, लेकिन सरकार बनाने का मौका उसे ही मिलना चाहिए। इसके विपरीत कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद का कहना है की जनता दल एस और कांग्रेस का गठबंधन स्पष्ट बहुमत से 4 सीटों से ज्यादा है। स्पष्ट बहुमत होने के बाद भी यदि राज्यपाल अल्प बहुमत वाले को सरकार बनाने का मौका देते हैं। तो यह लोकतंत्र, न्यायिक आदेशों और संवैधानिक प्रावधानों की हत्या होगी। जनता दल एस के नेता कुमार स्वामी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी हॉर्स ट्रेडिंग के काम में लगी हुई है। जनता दल एस के विधायकों को 100 करोड़ रुपया और मंत्री पद देने का लालच देकर विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। सार्वजनिक तौर पर जनता दल एस और कांग्रेस इस तोड़फोड़ में अपने विधायकों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। यह भी खबर आ रही है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर्नाटक में बन जाने के बाद बहुमत साबित करने के दिन 14 विधायकों को यदि सदन में नहीं आने दिया जाता है, तो अल्पमत होते हुए भी भारतीय जनता पार्टी सरकार का बहुमत साबित हो जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी की ओर से केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और अनंत कुमार ने मोर्चा संभाल रखा है। वहीं कांग्रेस की ओर से राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष खड़गे कर्नाटक में मौजूद है। यह सभी लोग कर्नाटक में अपने अपने पक्ष की सरकार बनाने को लेकर राज्यपाल वजूभाई बाला पर दबाव बना रहे हैं
पिछले 2 दिनों में कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर चल रहे इस नाटक को देख देख कर जनता भी अब राजनेताओं की तरह परिपक्व हो रही है। राजनीति के दांव पैच और राजनेता किस तरह अपना रंग और बयान बदलते हैं। इसको देखकर आम जनता भी अब इस नाटक का मजा ले रही है। कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच लोगों महाभारत की लड़ाई में समय-समय पर पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए सभी दांवपेच नैतिक और अनैतिक को अपना लिया था। लगभग वही स्थिति अब देखने को मिल रही हैं। कर्नाटक के नाटक में यदि लोगों को महाभारत दिख रही है, तो नेताओं को भी अब समझना होगा कि वह जनता को जो दिखा और समझा रहे हैं। उसके असर से वह भी नहीं बचेंगे। पिछले कुछ माहों में जिस तरह से नियम, कानून, संविधान और उसके प्रावधान का मनमाना उपयोग हुआ है। उससे आम जनता का विश्वास राजनेताओं, राजनीतिक दलों, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर घट रहा है। सत्ता पर किसी भी तरह से काबिज होने की राजनेताओं की यह भूख, एक बार फिर हमें जनतंत्र के स्थान पर राजतंत्र की ओर ले जा रही है। समय रहते यदि इस पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो स्थिति अनियंत्रित होते देर नहीं लगेगी।

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