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‘ओमेर्टा’ को लेकर चर्चा में हंसल

‘ओमेर्टा’ को लेकर चर्चा में हंसल

समाज से जुड़े जटिल और विवादास्पद विषयों को पेश करने में निर्देशक हंसल मेहता से सीखे। उन्होंने दस कहानियां, शाहिद, सिटीलाइट्स, अलीगढ़ और बोस जैसी फिल्मों से समाज के उन मुद्दों को उठाया जिन पर बात करने से भी लोग कतराते हैं। आजकल वह अपनी नई फिल्म ‘ओमेर्टा’ को लेकर चर्चा में हैं। यह फिल्म आतंकवादी उमर सईद की जिंदगी पर आधारित है।

‘ओमेर्टा’ का मतलब
‘ओमेर्टा’ का मतलब होता है, ‘कोड ऑफ साइलेंस’ जैसे कई बार हम सच्चाई का सामना करने से घबराते हैं। हम भारत और पाकिस्तान में अमन चाहते हैं पर यह कैसे मुमकिन होगा। जब दोनों देशों में तनाब बना रहता है। आतंकी और अपराधी छिपे रहते हैं। हंसल का कहना है कि अपनी फिल्म के लिए भी मुझे धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। जैसे कई बार जान से मारने की धमकी आ जाती है। मैं धमकियों पर ध्यान नहीं देता। ‘शाहिद’ के बाद भी मुझे धमकियां मिली थीं। मैंने उनसे यही कहा कि वह मैं ही था, जिसने ‘शाहिद’ बनाई और अब मैं उमर सईद की जिंदगी पर फिल्म बना रहा हूं। मुझे अपनी कहानी कहनी है क्योंकि इतिहास जिस तरह लिखा जाएगा, मुझे उस पर भरोसा नहीं है। इतिहास तो सरकारी तौर पर लिखा जाएगा, मगर मेरी फिल्मों के जरिए आनेवाली पीढ़ी कम से कम आज के दौर की सच्चाई तो जान पाएगी।
ओमेर्टा में पाक के हालात पेश करना चुनौतीपूर्ण था। इसमें पाकिस्तान के माहौल को दर्शाने के लिए पंजाब, दिल्ली और अन्य 3-4 जगहों पर शूटिंग की। एक खलनायक की कहानी पर फिल्म बनाना बहुत मुश्किल था। हीरो की कहानी का एक इमोशनल ग्राफ होता है मगर खलनायक के ग्राफ को दिखाना मुश्किल था, क्योंकि हमारा नायक ही खलनायक है। आप फिल्म देखने के बाद इस किरदार से नफरत करने लगेंगे।

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