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भ्रष्टाचार के गुलगुले लपककर निगलने की नैतिकता?

भ्रष्टाचार के गुलगुले लपककर निगलने की नैतिकता?

 (लेखक-अजित वर्मा)
आर.एस.एस.समर्थित श्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की भाजपा ने नैतिकता मामले में अपना सम्पूर्ण कांग्रेसीकरण कर लिया है। देशभर में जिस दागदार लोगों को भाजपा ने अपनी बाहों में समेटने का सिलसिला चला रखा है। उससे आज उसे तात्कालिक लाभ भले मिल जाए लेकिन दीर्घकाल में भ्रष्टाचार के गुलगुले लपक कर निगलने और नैतिकता का ढोंग करने के खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। ताजा उदाहरण यह भ्रष्टाचार के आरोप में सात साल तक कर्नाटक की राजनीति से वनवास झेलने वाले रेड्डी बंधुओं की भाजपा में वापसी हो गई है। इससे यह आकलन चल पड़ा है कि कर्नाटक चुनाव के राजनीतिक समीकरणों में इससे क्या बदलाव आयेगा? कर्नाटक और आन्ध्रप्रदेश में अवैध खनन मामले में करीब दो साल जेल में रहने वाले पूर्व मंत्री जनार्दन रेड्डी के भाई और रिश्तेदारों को बीजेपी विधानसभा चुनाव में अपनी ओर से पेश कर रही है। कहते हैं कि रेड्डी बंधुओं ने विधानसभा की सात सीटें भाजपा से मांगी हैं।

राजनैतिक हलकों में याद दिलाया जा रहा है अभी दो सप्ताह पहले ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि उनकी पार्टी का रेड्डी बंधुओं से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन पार्टी की ओर से जारी की गई उम्मीदवारों की सूची में रेड्डी बंधुओं में सबसे बड़े जी. करुनाकर रेड्डी को पार्टी ने हरादनहल्ली सीट से चुनावी मैदान में उतार दिया। उनके करीबियों में बी. श्रीरामुलू को मोलाकलमुरु सीट, जी. सोमशेखर रेड्डी को बेल्लारी सिटी सीट, श्रीरामुलू के रिश्तेदार सन्ना फकीरप्पा को बेल्लारी ग्रामीण सीट और टीएच सुरेश बाबू को कंपली सीट से टिकट दिए गए हैं। बीजेपी ने एक्टर और जनार्दन रेड्डी के करीबी साईकुमार को भी बागेपल्ली से टिकट दिया है।

स्वयं भाजपाई खेमे में कहा जा रहा है कि अमित शाह के मिशन 150 के कर्नाटक का चुनाव लड़ने वाली बीजेपी के लिए रेड्डी बंधुओं को साथ लेना मजबूरी था, क्योंकि आंध्र प्रदेश की सीमा पर बसे कर्नाटक के इलाकों के रेड्डी वोट बैंक को साधने के लिए इनका साथ आना जरूरी था। जिन सीटों पर रेड्डी वोट बैंक है, उस सभी सीटों पर बीजेपी ने रेड्डी ब्रदर्स के हाथ में ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर कमान सौंपी है। इसके अलावा सिद्धारमैया के अहिंदा वोट बैंक को साधने के लिए बीजेपी ने सांसद होने के बावजूद श्रीरामुलू को मोलाकलमुरु सीट से उम्मीदवार बनाया है। कहा जा रहा है कि पार्टी आलाकमान को रेड्डी बंधुओं के पक्ष में लाने के लिए श्रीरामुलू ने काफी मेहनत की है।

याद आता है कि कर्नाटक में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान जनार्दन रेड्डी जेल में थे और उनका माइनिंग का साम्राज्य खतरे में पड़ा गया था। बीजेपी ने भी उन्हें पार्टी से बेदखल कर दिया था और उनके करीबी बी. श्रीरामुलू ने बीएसआर कांग्रेस नाम से अपनी अलग पार्टी बनाई थी, जिसने उस चुनाव में तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। 2014 तक पहुंचते-पहुंचते बीजेपी से अलग होकर बनी येदियुरप्पा की केजेपी और श्रीरामुलू की बीएसआर कांग्रेस की बीजेपी में वापसी हो गई। 2014 में हुई लोकसभा चुनाव में इसी के कारण राज्य की 28 सीटों में से 17 पर बीजेपी ने जीत हासिल की। उन चुनावों के दौरान बीजेपी ने रेड्डी बंधुओं से दूरी बनाकर रखी थी। लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने जिस तरह से रेड्डी वोट बैंक को साधने की चाल चली है, उससे बीजेपी को फायदा हो सकता है। लेकिन सार्वजनिक जीवन में दागियों को प्रतिष्ठित किया जाना अंतत: लोकतंत्र को कलंकित ही करेगा।
04अप्रैल/ईएमएस

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