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(राज काज) आंबेडकर को ब्राह्मण बताने वाली सोच, अली बाबा चालीस चोर की सरकार, आजादी के प्रतीक लाल किले पर सवाल, अपनों को निशाने पर लेता पाक

(राज काज) आंबेडकर को ब्राह्मण बताने वाली सोच, अली बाबा चालीस चोर की सरकार, आजादी के प्रतीक लाल किले पर सवाल, अपनों को निशाने पर लेता पाक

आंबेडकर को ब्राह्मण बताने वाली सोच
यह तो अधिकांश लोग मानते हैं कि ब्राह्मण वही होता है जो ब्राह्मण कुल में जन्म लेता है, इसलिए मानवों में अपने को सर्वश्रेष्ठ मानने वाले ब्राह्मण समाज के लोग कहते हैं कि उनकी तरह ब्राह्मण बनने के लिए किसी भी अन्य जाति या संप्रदाय के लोगों को सात जन्म भी कम पड़ जाएंगे, क्योंकि ब्राह्मण परिवार में जन्म लेना असाधारण बात होती है। इसके विपरीत गुजरात विधानसभा के स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संविधान निर्माता डॉ. बीआर आंबेडकर भी ‘ब्राह्मण’ हैं। इसके साथ ही उन्होंने कृष्ण भगवान को ओबीसी बताया, जिन्हें ऋषि संदीपनी ने भगवान बनाया था। श्री त्रिवेदी गांधीनगर में ‘समस्त गुजरात ब्रह्म समाज’ के ब्राह्मण व्यापार-रोजगार सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, इसलिए उन्होंने यहां आंबेडकर को भी ब्राह्मण बताकर समाज को जोड़ने जैसा काम किया है। दरअसल दलितों पर हो रहे अत्याचार के बाद तमाम विचारक और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग चिंतित हैं कि इस हिंसा को कैसे रोका जाए। इसलिए इस प्रकार से भाई-चारे का संदेश देकर सभी को जोड़ने का काम किया जा रहा है।

अली बाबा चालीस चोर की सरकार
भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पिछले काफी समय से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। इसकी वजह बिहारी बाबू रुपी एक स्टार प्रचारक को पार्टी व मोदी सरकार द्वारा हाशिये पर पटके रखना है। इस मामले में राजनीतिज्ञों का तो यहां तक कहना रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जो अनदेखी शत्रुघ्न सिन्हा की पार्टी द्वारा की गई थी उसके बाद यदि कोई और नेता होता तो शायद पार्टी ही छोड़ चुका होता। बहरहाल शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी में रहते हुए ही अपना विरोध जताने का जो काम किया उससे उन्हें खूब सुर्खियां बटोरने का अवसर भी मिला है। हाल ही में शत्रुघ्न ने कहा कि वो जो कुछ कर रहे हैं और कह रहे हैं वह देशहित में है। उनकी नजर में पार्टी से बड़ा देश होता है और देशहित में जो बन पड़ेगा वो करेंगे। यही वजह है कि वन नेशन वन टैक्स मामले में वो मोदी सरकार को घेरते हैं और यहां तक कह जाते हैं कि यह सरकार अली बाबा चालीस चोर वाली सरकार लगती है। इसके साथ ही वो अपने ही अंदाज में कह जाते हैं कि उन्हें किसी व्यक्ति से कोई न तो डर है और न ही खिलाफत लेकिन देशहित में जो बन पड़ेगा वो तो करना ही पड़ेगा।

आजादी के प्रतीक लाल किले पर सवाल
मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा 17वीं शताब्दी में निर्मित ऐतिहासिक इमारत लाल किले को निजी हाथों में सौंपे जाने का जो काम केंद्र की मोदी सरकार ने किया है अब उसका विरोध होने लगा है। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने लाल किले का ठेका डालमिया ग्रुप को दे दिया है। विपक्षी दलों की आलोचनाओं के बीच अब पर्यटन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डालमिया भारत लिमिटेड के साथ हुआ समझौता 17वीं शताब्दी के इस स्मारक के अंदर और इसके चारों ओर पर्यटक क्षेत्रों के विकास एवं रख-रखाव के लिए है। इस पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की आजादी के प्रतीक लाल किले को कॉरपोरेट के हाथों बंधक रखने की तैयारी कर रहे हैं। क्या मोदी जी या भाजपा लाल किले का महत्व समझती हैं? अब यह सवाल आमजन के जेहन में भी कौंध रहा है कि ऐतिहासिक और स्वतंत्रता के प्रतीक लाल किले को मोदी सरकार आखिर अपने कारपोरेट मित्रों के हाथों कैसे सौंप सकती है।

अपनों को निशाने पर लेता पाक
दुनिया जान चुकी है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक है, इसलिए बड़े पैमाने पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसका विरोध भी हो रहा है। इससे पाकिस्तान बौखला गया है और अब वह अपने ही लोगों को निशाना बनाने से भी गुरेज नहीं कर रहा है। दरअसल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के निर्वासित नेता शौकत अली कश्मीरी ने पाकिस्तान के अंदरूनी हालात पर बोलते हुए पाक सेना को निशाने पर लिया है। मानवाधिकार उल्लंघन के मद्देनजर पश्तूनों के आंदोलन के बीच शौकल अली ने कहा कि पाकिस्तान की सेना आज अपने ही लोगों को मार रही है। यही नहीं बल्कि उन्होंने यहां तक दावा किया है कि युद्ध के लिए उनके पास निजी रक्षक योद्धा भी हैं। लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल जैसे आतंकी संगठन पाकिस्तानी सैन्य जनरलों के प्रतिनिधि हैं। इस प्रकार समझा जा सकता है कि पाकिस्तान में क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है।

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