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देश की तरक़्क़ी के लिए ‘सेक्रीफाइस’ लाज़िमी है…….. (लेखक-ज़हीर अंसारी)

देश की तरक़्क़ी के लिए ‘सेक्रीफाइस’ लाज़िमी है…….. (लेखक-ज़हीर अंसारी)

आजकल कुछ लोग बड़ी अव्यवहारिक बातें कर रहे हैं। जो मन में आ रहा है बके जा रहे हैं। पेट्रोल- डीज़ल के ज़रा से रेट क्या बढ़े हाय तौबा मचाने लगे। सरकार को कठघरे में खड़ा करने लगे। बताने लगे कि पेट्रोल 82 रुपए प्रति लीटर हो गए। याद दिलाने लगे कि यूपीए की सरकार में इतना था, उतना था। ऐसे पगलों को तनिक भी समझ नहीं हैं कि देश बदल चुका है। चार साल पहले की परिस्थियाँ अलग थी, आज के हालात अलग हैं। आज की सरकार ने बहुत सारे वायदे किए थे जिन्हें पूरा करना आवश्यक है। देश को इंटरनेशनल लेवल पर स्थापित करना है। अंतिम पंक्ति में खड़े दीन-हीन व्यक्ति को आगे लाना है। ऐसे में आमजन का कर्तव्य बनता है कि वो अपनी सरकारों के साथ खड़ी रहे। सत्तर साल से बिगड़ी व्यवस्था को पटरी में लाने के लिए कम से कम सत्तर महीने तो देने ही पड़ेंगे। कुछ कांग्रेस समर्थक लोग बेवजह सरकार की छीछालीदर कर रहे हैं। उन्हें सरकार के हर काम और योजना में नुक्श दिख रहा है। कुछ भी उलटा-सीधा आरोप मढ़ रहे हैं। कांग्रेस और विपक्ष के अंध समर्थकों को सावन में अंधेरा नज़र आ रहा है। कोई न कोई बहाना लेकर सत्ता पक्ष पर भड़ास निकाल रहे हैं। जिन्हें नौ का पहाड़ा ठीक से नहीं आता वो प्रति बैरल क्रूड ओईल की गणना बता रहे हैं। इन अक़्ल के अंधों को यह तक पता नहीं क्रूड ओईल आयात होता है। सिरिया में छिड़े युद्ध की वजह से क्रूड ओईल और गोल्ड के दामों में उछाल गया है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध की आशंका से तथा अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड ओईल में बढ़ोत्तरी हुई है। जिससे इंटरनेशनल मार्केट प्रभावित हुआ है। उधर तेल उत्पादक देशों के संगठन ने सप्लाई कम कर दी है ताकि माँग अनुसार रेट बढ़ाया जा सके।ओईल और गोल्ड की सप्लाई पर संकट के बदल मँडरा रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में पेट्रोल-डीज़ल के दामों में तनिक वृद्धी हो गई तो लगे निंदा करने। केलकुलेटर से हिसाब जोड़कर बता रहे हैं कि डीज़ल-पेट्रोल पर आधा एक्साइज और वेट के रूप में सरकारें वसूल रही हैं। ये न बताएँगे कि दो सौ रुपए किलो वाली दाल आधे से भी कम की हो गई है। अस्सी रुपए किलो बिकने वाला प्याज़-टमाटर आठ-दस रुपए किलो में मारा-मारा फिर रहा है।

सत्ता की मलाई खाने वाले जिन्हें अब खुरचन भी नहीं मिल रहा, अफ़वाह फैला रहे हैं कि पेट्रोल 82 रुपए और डीज़ल 71 रुपए लीटर हो गया है। जबकि वास्तविक क़ीमत पेट्रोल की 80 रुपए 32 पैसे है और डीज़ल 69 रुपए 53 पैसे।

अस्सी के दशक में 25 हज़ार रुपए में बिकने वाली बाइक आज 60 हज़ार रुपए के ऊपर पहुँच गई उस पर ये कुछ न बोलेंगे। सिनेमा की 20 रुपए वाली टिकिट सौ-सवा सौ रुपए की हो गई तो भी न बोलेंगे। चाय रोटी या रोटी में नमक प्याज़ लगाकर नाश्ता करने वाले अब 4-5 सौ रुपए का ब्राण्डेड पिज़्ज़ा खाकर उलाहना दे रहे हैं कि पेट्रोल-डीज़ल महँगा हो गया।

वक़्त की नज़ाकत को समझिए और अनर्गल बातें करने वालों से सतर्क रहिए। देश की तरक़्क़ी और मज़बूती के लिए थोड़ा ‘सेक्रीफाइस’ लाज़िमी है। जब पब्लिक ख़ामोशी से बढ़ी दरों पर डीज़ल-पेट्रोल ख़रीद कर संतुष्ट है तो विरोधियों को हल्ला-गुल्ला नहीं मचाना चाहिए।

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