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जिन्होंने संरक्षित करने का रखा कार्यक्रम उन्होंने ही किया दूषित

जिन्होंने संरक्षित करने का रखा कार्यक्रम उन्होंने ही किया दूषित

सामाजिक कार्यकर्ता अरुण शर्मा की कलम से

बांकी उद्गम स्थल को दूषित किये जाने पर कार्यक्रम के दौरान किया गया आपत्ति

पृथ्वी दिवस के अवसर पर जशपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सीटोंगा के बांकी उद्गम को संरक्षित किये जाने के लिए संगोष्ठी का वन विभाग के सहयोग से आयोजन किया गया था उक्त आयोजन के पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता ने उद्गम स्थल पर तत्काल कार्य करने इच्छा जाहिर की जिसे आयोजन समिति के द्वारा नज़रअंदाज़ किया गया।।

आयोजन को लेकर भाड़ी भरकम भीड़ और सार्थक संगोष्ठी की जमकर सराहना की जा रही है जो काबिले तारीफ़ है ,, लेकिन कार्यक्रम के पूर्व वन अधिकारी के द्वारा किया गया कार्य का चारों ओर निंदा किया जा रहा है।उक्त विवाद के बाद जहा आपत्तिकर्ता कार्यक्रम से ही मुंह मोड़ कर संगोष्ठी से बाहर निकल पृथ्वी दिवस को सार्थक बनाने जिले के विभिन्न उद्गम स्थलों सहित पहाड़ो व नदियों की ओर निकल पड़े।

ज्ञात हो की पृथ्वी दिवस के अवसर पर रविवार को सीटोंगा के बांकी व श्री नदी के उद्गम स्थल को संरक्षित किये जाने के लिए संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन वन विभाग के सहयोग से किया गया था।उक्त आयोजन को लेकर सभी लोगों में भारी उत्साह देखा गया और भारी उत्साह के मध्य उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया जिसकी सुरुवात पूजा अर्चना कर किया गया।उक्त पूजा में वन विभाग के एस के गुप्ता के द्वारा बैगाओं के साथ पूजा अर्चना किया गया।जिसके बाद नारियल के छिलके सहित कुछ अन्य सामग्री को उसी उद्गम स्थल में डाला गया जिसके संरक्षण के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।उक्त घटना की आयोजन समिति के साथ आये एक सामजिक कार्यकर्त्ता के द्वारा द्वारा आयोजन को लेकर सवालिया निशान उठाया गया,साथ ही यह कह कर निंदा किया गया कि जिस उद्गम के संरक्षण के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया उसी को नारियल के छिलके सहित अन्य सामान डालकर दुषित क्यों किया जा रहा है जो स्थिति उद्गम की थी पे उसके हितार्थ कार्य होना था संगोष्ठी कार्यक्रम भविष्य में भी किया जा सकता था, उक्त सामाजिक कार्यकर्ता के विचार से उपस्थित लोगों में से शिवप्रसाद राम ही सन्तुष्ट दिखे,,
आयोजन समिति के द्वारा इस पर सहमति नहीं देने पर सामाजिक कार्यकर्ता उक्त कार्यक्रम से मुंह मोड़ कर पृथ्वी दिवस को सफल बनाने अन्य पहाड़ों व उद्गम स्थलों की ओर निकल पड़े।

संगोष्ठी कार्यक्रम का हो सभी जगह आयोजन
सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा उक्त संगोष्ठी कार्यक्रम को जिले में सभी जगह कराये जाने का बात कहा जा रहा है,, विदित हो की सीटोंगा में आयोजित कार्यक्रम में सार्थक चर्चा हुवा जिनकी इस समय आवश्यकता भी है इस सार्थक चर्चा का परिणाम है कि उक्त स्थल के संरक्षण के लिए इतने लोगों के द्वारा संकल्प लेकर 1 मई का कार्यक्रम आयोजित किया है।रविवार को कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने जिस प्रकार बांकी नदी के उद्गम स्थल को सहेजने के लिए कदम उठाया वो वाकई सराहनीय है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाया सवालिया निशान
सामजिक कार्यकर्त्ता के द्वारा उक्त आयोजन को लेकर सवालिया निशान उठाते हुवे कहा गया है कि जिसने संरक्षित किये जाने का जिम्मा उठाया था उसने ही उसे दूषित कर दिया यदि ऐसा ही होता रहा तो सफाई करना न करना सब बराबर है।

मामला को किया गया दबाने के पूरा प्रयास
दरअसल मामला उस वक़्त तुल पकड़ता नजर आया जब आयोजनकर्ता के द्वारा ही जिस कार्य के लिए संगोष्ठी का आयोजन किया गया था उसी कार्य को दूषित करने का प्रयास किया गया तभी आपत्ति किये जाने पर संगोष्ठी कार्यक्रम पर सवालिया निशान उठाया गया।जिसकी खबर आज का दिन के द्वारा निर्भीक और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किया गया उक्त खबर के प्रकाशन के बाद जहा एक और कुछ संगठनों के द्वारा उक्त मामले को दबाने का पुरजोर प्रयास किया गया वही उक्त घटनाक्रम से अनभिज्ञ लोगों द्वारा आपत्ति भी किया गया।जिसका परिणाम है की उक्त घटनाक्रम किसी भी अखबार या वेब पोर्टल में जिक्र तक नहीं हो पाया।लेकिन आज का दिन के द्वारा उक्त घटना का वास्तविक खबर प्रकाशित कर सच सबके सामने लाया गया है।

आज का दिन में प्रकाशित खबर वहाँ का घटनाक्रम है जिसे सामाजिक कार्यकर्ता के कथन अनुसार लिखा गया है इस खबर का उद्देश्य किसी को आहत करना या किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है।आज के समय में पर्यावरण सहित जल स्तर को संरक्षित किये जाने की आवश्यकता है रविवार को हुवे इस सार्थक पहल में शामिल सभी लोगों को आज का दिन धन्यवाद देता है कि वे इसे सहेजने व संरक्षित करने के लिए एक कदम आगे तो बढे।।

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