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गिरीश कर्नाड को श्रद्धांजलिः कला की एक बेहतरीन आवाज आज मौन हो गई

गिरीश कर्नाड को श्रद्धांजलिः कला की एक बेहतरीन आवाज आज मौन हो गई

गिरीश कर्नाड के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जताया शोक.

बेंगलुरु. भारतीय कला जगत की एक और आवाज आज मौन हो गई. प्रख्यात नाटककार, अभिनेता और निर्देशक गिरीश कर्नाड नहीं रहे. बेंगलुरू स्थित उनके आवास पर सोमवार को कर्नाड का निधन हो गया. वह 81 वर्ष के थे. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कर्नाड कुछ समय से बीमार थे. गिरीश कर्नाड आजीवन अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकार बनकर रहे. उनके निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी समेत साहित्य और सिनेमा से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं ने गहरा शोक जताया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘गिरीश कर्नाड के निधन का समाचार दुखी करने वाला है. लेखक, अभिनेता और भारतीय रंगकर्म की इस विराट हस्ती के जाने से देश शोक में है. मैं उनके परिवार और गिरीश कर्नाड के रास्ते पर चलने वालों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करता हूं.’ इधर, कर्नाटक सरकार ने गिरीश कर्नाड के निधन पर तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है. सीएम एचडी कुमारस्वामी के हवाले से की इस बाबत घोषणा की गई.

गिरीश कर्नाड के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है. पीएम मोदी ने टि्वटर पर जारी अपने शोक संदेश में कहा, ‘विभिन्न कला माध्यमों के जरिए अपनी विलक्षण अभिनय प्रतिभा की छाप छोड़ने वाले गिरीश कर्नाड हमेशा याद किए जाएंगे. वे विभिन्न मुद्दों पर मुखर होकर अपने विचार रखने वाले व्यक्तियों में से एक थे. आने वाले वर्षों में उनके किए काम उन्हें याद किया जाएगा. गिरीश कर्नाड का निधन अपूरणीय क्षति है. मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं.’ आपको बता दें कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड ने अनेक नाटकों और फिल्मों में अभिनय किया जिनकी काफी सराहना हुई.

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके कर्नाड को 1974 में पद्म श्री और 1992 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया. वह 1960 के दशक में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रोहड्स स्कॉलर भी रहे जिससे उन्होंने दर्शनशास्त्र, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की. उनके कन्नड़ भाषा में लिखे नाटकों का अंग्रेजी और कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया. उन्होंने मशहूर कन्नड़ फिल्म ‘‘संस्कार’’ (1970) से अभिनय और पटकथा लेखन के क्षेत्र में पदार्पण किया. यह फिल्म यूआर अनंतमूर्ति के एक उपन्यास पर आधारित थी. फिल्म का निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया और फिल्म को कन्नड़ सिनेमा के लिए पहला राष्ट्रपति गोल्डन लोटस पुरस्कार मिला.

हालांकि, उन्होंने बतौर अभिनेता सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की लेकिन उन्हें लेखक और विचारक के रूप में जाना जाता है. कर्नाड अपनी पीढ़ी की सर्वाधिक प्रतिष्ठित कलात्मक आवाजों में से एक थे. वह प्रतिष्ठित नाटककार थे. उनके नाटक ‘‘नागमंडल’’, ‘‘ययाति’’ और ‘‘तुगलक’’ ने उन्हें काफी ख्याति दिलाई. उन्होंने ‘‘स्वामी’’ और ‘‘निशांत’’ जैसी हिंदी फिल्मों में भी काम किया. उनके टीवी धारावाहिकों में ‘‘मालगुडी डेज़’’ शामिल हैं जिसमें उन्होंने स्वामी के पिता की भूमिका निभाई. वह 90 के दशक की शुरुआत में दूरदर्शन पर विज्ञान पत्रिका ‘‘टर्निंग प्वाइंट’’ के प्रस्तोता भी थे. बाद में वर्षों में कर्नाड सलमान खान की ‘‘टाइगर जिंदा है’’ और अजय देवगन अभिनीत ‘‘शिवाय’’ जैसी व्यावसायिक फिल्मों में भी दिखाई दिए.

साभार: इनपुट एजेंसी

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