• युवा कलेक्टर जशपुर की प्रेरणा से कुरकुंगा के युवा कर रहे नॉकआउट फुटबाल का आयोजन दर्शकों से खचाखच भरा रहता है मैदान
  • श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि
  • *स्वतंत्रता दिवस पर शहीद पुलिस कर्मचारी प्रधान आरक्षक ओबेदान को थाना कांसाबेल द्वारा दी गई श्रद्धांजलि…पढ़िए पूरी खबर*
  • बहनों ने भाइयों के कलाई में बांधे रक्षा के सूत्र ,मुँह मीठा कराकर लंबी उम्र की भी कामना की…पढिये पूरी खबर।
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय ने बंदरचुआं के हाइस्कूल में किया ध्वजारोहण….. बच्चों द्वारा दी गयी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति…… पढिये पूरी खबर।
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय ने बंदरचुआं के हाइस्कूल में किया ध्वजारोहण….. बच्चों द्वारा दी गयी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति…… पढिये पूरी खबर।
  • rampukar mantri
  • hiru kisan congress
  • के बी पटेल नर्सिंग कॉलेज
  • add education 01

हामिद और आमना की ईद

हामिद और आमना की ईद

“नीलिमा मिश्रा”
बूढ़ी आमना अपनी कोठरी में बैठ आँसू बहाती ईद को कोस रही है कि इस मुये को मुझ ग़रीब की झोपड़ी में क्यों आना था।उधर बच्चा हामिद बेहद ख़ुश है कि उसके दिवंगत अम्मी अब्बु अलावा मियाँ के यहाँ से ढेर सारे पैसे और अच्छी अच्छी नियामतें लेकर आयेंगे। साथ ही उसे ईद के मेले में दोस्तों के संग जाना है ।दादी ने उसे तीन पैसे दिये हैं जिससे उसे सारे जहान की ख़ुशियाँ ख़रीदनी है ।तो क्या हुआ मोहसिन,नूरे और सम्मी के पास उससे कहीं बहुत ज़्यादा पैसे हैं।रहें उनकी बला से ,उसे चरखी में झूल ,सड़ी मिठाई खाकर या मिट्टी के टूट जाने वाले खिलौने ख़रीदकर पैसे बरबाद नहीं करने हैं।उसे तो कोई उपयोगी चीज़ ख़रीदना है।
इस चिमटे को कितने में दोगे ।हामिद के सवाल पर चिमटेवाले को आश्चर्य होता है कि चार पाँच साल के बच्चे का चिमटे से क्या काम ।अब यहाँ हामिद की अकड़ या आत्मविश्वास देखिये ।तुम्हें इससे क्या ,दाम बताओ।चिमटा वाला पाँच पैसे में तैयार होता है ।पर हामिद के पास तो मात्र तीन पैसे हैं
और झिड़की खाने का डर भी है।तीन पैसे में दोगे ,कहकर हामिद आगे बढ़ जाता है।अरेरे यह क्या दुकानदार तो उसे बुलाकर तीन पैसे में चिमटा दे देता है।शायद अल्लामियाँ का नेक बंदा है।
अब हामिद मियाँ अपने “रुस्तमे हिंद” यानि चिमटे को शान से अपने काँधे पर रखकर अपने दोस्तों के सामने इतराते हैं मानों वो लोहे का चिमटा ना होकर कारुँ का ख़ज़ाना हो जिससे सारी दुनिया को जीत सके।
गाँव में ईदगाह से लौटने की टोली से हलचल मच जाती है।दादी आमना पोते हामिद से मेले का हालचाल पूछती है और जिज्ञासा करती है कि हामिद ने उन तीन पैसों का क्या किया।ओह बूढ़ी आमना तो रोते रोते बच्ची बन गई और बच्चे हामिद ने बूढ़े का पार्ट किया ।वो रोटियाँ सेंकते दादी की जलती उँगलियों को बचाने लोहे का चिमटा यानि रुस्तमे हिन्द जो ख़रीद लाया।
यहाँ आमना के आँसू दिल को जार जार रोने पर मजबूर करते हैं।समझ नहीं आता कि ये आँसू किसके लिये हैं बच्ची आमना के लिये हैं या बूढ़े हामिद के लिये। बचपन से ये कहानी पढ़ती आ रही हूँ और अंत में हमेशा आँखें रोती हैं।
इतनी इतनी मार्मिक और संवेदनशील कहानी के लिये मुंशी प्रेमचँद को किन शब्दों में धन्यवाद कहुं ,बधाई दूँ या नमन करुँ ,नतमस्तक हूँ।

About Aaj Ka Din

Leave a reply translated

  • rampukar mantri
  • hiru kisan congress
  • के बी पटेल नर्सिंग कॉलेज
  • Samwad 04
  • samwad 03
  • add seven