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खरसिया में किडनी निकालने का मामला.., संगीन मामले में पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

खरसिया में किडनी निकालने का मामला.., संगीन मामले में पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

जांच के नाम पर कहीं हो ना जाए लीपापोती

खरसिया से वी सी शर्मा की रिपोर्ट

खरसिया: गलत इंजेक्शन से हुई मौत और अवैध गर्भपात के ओराप से बदनाम डॉ. विक्रम राठिया के वनांचल केयर हॉस्पिटल में पथरी निकलवाने आई महिला की किडनी निकालने का संगीन मामला प्रकाश में आया है। वहीं इस मामले में भी पुलिस की सुस्त कार्रवाई और स्पेशलिस्ट द्वारा जांच के बाद अपराध पंजीबद्ध करने की बातों से महिला के परिजन व्यथित हैं।

30 मई को जिले के प्रभारी एवं कैबिनेट मंत्री उमेश पटेल व रायगढ़ कलेक्टर द्वारा सिविल अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डॉ. विक्रम राठिया अपनी कार्यशैली के चलते जमकर लताड़ गए थे। वहीं उन्होंने शाम होते ही अपनी इस खीज को महिला पेशेंट पर निकाल दिया। ग्राम मरकाम-गोढ़ी सक्ती से पथरी के इलाज के लिए आई 62 वर्षीय महिला सुमित्रा पटेल की किडनी डॉ.विक्रम राठिया, डॉ.सजन अग्रवाल, डॉ.आरके सिंह द्वारा ऑपरेशन के दौरान निजी अस्पताल वनांचल केयर में निकाल दी गई। वहीं महिला के परिजनों द्वारा पूर्व में कोरे कागज पर दस्तखत करवा लिए गए थे। ऑपरेशन के कुछ समय बीत जाने पर डॉक्टरों ने परिजनों को सूचित किया कि किडनी सड़ चुकी थी, जिससे हो रहे तेज रक्तस्राव के कारण निकालना जरूरी था, इसलिए किडनी भी निकाल दी गई है। परंतु किडनी निकालने से पूर्व डॉक्टरों द्वारा परिजनों से कोई चर्चा तक नहीं की गई थी। वहीं महिला के पुत्र ऐश्वर्य पटेल ने बताया कि 28 मई को रायगढ़ के एक सोनोग्राफी सेंटर में मां की सोनोग्राफी करवाई गई थी, जिसमें किडनी पर किसी प्रकार का इन्फेक्शन होना नहीं पाया गया था। ऐसे में यह तय करना होगा कि या तो रायगढ़ के सोनोग्राफी सेंटर की रिपोर्ट गलत है या फिर खरसिया के डॉक्टर्स झूठ बोल रहे हैं।

परिजनों ने पुलिस को सौंपा मामला

बिना बताए किडनी निकालने जैसे संगीन मामले से नाराज परिजनों ने चौकी में शिकायत दर्ज करते हुए डॉक्टर के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस प्रशासन द्वारा विवेचना के उपरांत मामला पंजीबद्ध किए जाने की बात कहीं जा रही हैं। ऐसे में पीड़ित महिला के परिजनों सहित नगर में चर्चा है कि हमेशा की तरह गलत कार्यों को अंजाम देने वाले डॉ.विक्रम राठिया अपने पैतरों में कामयाब होते हुए पिछले केसेज की तरह इसे भी दबा ना दें।

यह पहला अवैध कारनामा नहीं

डॉ विक्रम राठिया एवं वनांचल के लिए यह पहला अवैध मामला नहीं है। यहाँ हुए अवैध गर्भपात को लेकर शिवसेना ने 9 अप्रैल को डॉ.राठिया पर उचित कार्रवाई करने हेतु चौकी में सूचना दी थी। वहीं अब तक यह मामला लंबित है। 23 फरवरी 2018 को समीर ओहदार नाम के युवक की वनांचल क्लीनिक में इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद खून की उल्टी करते हुए मृत्यु हो जाने का मामला भी लीपापोती कर दिया गया है। वहीं पूर्व के भी अनेक किस्से हैं परंतु यह सब किस्से, कहानियों में ही तब्दील हो चुके हैं और वनांचल केयर में इलाज के नाम से ग्रामीणों का खून चूसा जाना बेधड़क बदस्तूर चला आ रहा है। अब देखना होगा कि पूरे प्रदेश को दहला देने वाले इस संगीन मामले में पीड़ित पक्ष को न्याय मिल पाएगा या फिर सब कुछ पहले की तरह ही रफा-दफा कर दिया जाएगा।

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