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राहुल की जगह पर शरद पवार होंगे कांग्रेस के नए अध्यक्ष..? सदन की कमान संभालेंगे राहुल, एनसीपी का कांग्रेस में विलय

राहुल की जगह पर शरद पवार होंगे कांग्रेस के नए अध्यक्ष..? सदन की कमान संभालेंगे राहुल, एनसीपी का कांग्रेस में विलय

चुनाव में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस पार्टी तथा उसके साथ गठबंधन में भागीदार रहे तमाम राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों में हार के कारणों को लेकर के गहन मंथन चल रहा है।

“मुंबई से तबस्सुम खान तथा नई दिल्ली से आलोक मोहन की मोहन की रिपोर्ट”

मंथन में कांग्रेस पार्टी के अलावा शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है आज एनसीपी की कोर कमेटी में महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव एवं लोकसभा चुनाव में करारी हार के कारणों पर चिंतन मनन हो रहा है इसके पूर्व गत दिनों अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी शरद पवार से उनके दिल्ली स्थित जनपद पर मुलाकात की थी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद राहुल गांधी की सबसे पहले पवार से मुलाकात हुई।

राजनीतिक हलकों में इसके तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद अगले कुछ दिनों के अंदर एनसीसी का कांग्रेस में विलय हो जाए, बता दें की एनसीपी को लोकसभा चुनाव में 5 सीटों से ही से ही संतोष करना पड़ा, aajkadinnews.com को मिली जानकारी के मुताबिक एनसीपी का कांग्रेस में विलय के बाद शरद पवार को पूरी कांग्रेस कमेटी का कार्यभार सौंपा जा सकता है। तथा अगले कुछ सप्ताहों में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल के जगह पर नामित किया जा सकता है, वर्तमान में शरद पवार एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य सदस्य हैं, अगर एनसीपी का कांग्रेस में विलय हो जाता है तो वे कांग्रेस को नई दिशा व दशा दे सकते हैं. यहां यह बताना उचित होगा 1978-1983 एवं 1986 में भी शरद पवार कांग्रेस से बाहर जा चुके हैं,लेकिन 1986 में उन्होंने राजीव गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस सोशलिस्ट का कांग्रेस में विलय कर दिया था,कमोबेश बीच में यह विदेशी मूल के सवाल पर कांग्रेस से अलग हटकर के एनसीपी का गठन किया था उस समय पी ए संगमा, तारिक अनवर भी शरद पवार के साथ के साथ गए थे लेकिन लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष रहे पी ए संगमा का निधन हो चुका है जबकि तारिक अनवर कुछ महीने पहले ही कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं. इससे लगता है की विदेशी मूल के सवाल पर अब यह मामले भी इतने महत्वपूर्ण नहीं रह गए हैं गए हैं जितना तत्कालीन समय में था. तब से लेकर अब तक गंगा का पानी बहुत बह चुका है. यूपीए सरकार में शरद पवार रक्षा मंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक का पद संभाल चुके हैं कांग्रेस को लगता है इस समय अगर भारतीय जनता पार्टी व उसके मुखिया अमित शाह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले कुछ वर्षों तक सियासी स्तर पर कोई अगर करारी और कड़ी टक्कर दे सकता है तो वह शरद पवार का पवार ही हैं, राजनीतिक हलकों में पवार की पावर का सबको अंदाज है। मिली जानकारी के मुताबिक चुनाव पूर्व एक बड़े पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने धमकी भरे अंदाज में शरद पवार को चुनौती दी थी, इस बात को लेकर शरद पवार भी वर्तमान राजग सरकार के मुखिया से खुन्नस खाए हुए हैं बताया जाता है एक बड़े औद्योगिक घराने के दखल से शरद पवार और उस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच में समझौता कराया गया। लेकिन पवार इस घटना को भूले नहीं हैं हकीकत क्या है इस बात का खुलासा अगले कुछ दिनों में होने की संभावना है…? लेकिन विपक्षी दलों में जिस तरह से सूखा पड़ा हुआ है उस सूखे को राजनीतिक दृष्टिकोण से शरद पवार ही हरा भरा कर सकते हैं। इस बात का एहसास उन तमाम बड़े कांग्रेसियों को भी है जो कहीं न कहीं राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने पर टकटकी लगाए बैठे हैं, राहुल गांधी भी इस बात को जानते हैं की जो लोग अपने पुत्रों के लिए पार्टी को दांव पर लगा सकते हैं उन्हें कभी भी गच्चा दे सकते हैं aajkadinnews.com को मिली को जानकारी के अनुसार कांग्रेस में चाणक्य की भूमिका निभाने वाले एक वरिष्ठ नेता की वजह ऐसा संभव हो पा रहा है इस नेता के परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं है लेकिन जब कभी भी कांग्रेस पार्टी में संकट आता है तथा गठबंधन की बात आती है तो उक्त नेता अहम भूमिका अदा करता है लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर के भी इस नेता की अहम भूमिका रही है तथा वह हमेशा नेहरू गांधी परिवार के इर्द-गिर्द हर संकट में साए की तरह रहता है उसी की कोशिश है की पवार को पावर देने के लिए एनसीपी को कांग्रेस में लाने की कवायद तेज हो गई है मिली जानकारी के मुताबिक अगर ऐसा होता है तो लोकसभा में कांग्रेस की संख्या 52 से बढ़कर 57 हो जाएगी जिससे कांग्रेस को विपक्ष के नेता पद का पद मिल जाएगा। राहुल गांधी मंशा जता चुके हैं की वे लोकसभा में भी प्रतिपक्ष के नेता पद पर बने रहने के लिए तैयार हैं। जबकि शरद पवार को कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष पद सौंपा जा सकता है।

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