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छात्र-छात्रओं के साथ गुरुजियों को होने वाले डेढ़ महीने ग्रीष्मकालीन अवकाश पर लग गई नजर…, शिक्षकों के गले का फ़ांस बना SLA

छात्र-छात्रओं के साथ गुरुजियों को होने वाले डेढ़ महीने ग्रीष्मकालीन  अवकाश पर लग गई नजर…, शिक्षकों के गले का फ़ांस बना SLA

शिक्षकों का लगातार प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करती सरकार से शिक्षकगण SLA के प्रयोग से परेशान हैं,

वार्षिक परीक्षा का नाम बदलकर SLA मतलब अब इसे राज्य स्तरीय आंकलन परीक्षा का नाम दिया गया है,प्रयोगशाला बने शिक्षा विभाग में नई सरकार आते ही एक नया प्रयोग SLA किया जा रहा है, इसमे परीक्षा की पद्धति बदली गई है,पास फैल का वही पुराना नियम यानी फैल नही करने का वही पुराना नियमह है,लेकिन अंक सूची कैसे बनेगी इसका स्पष्ट दिशा निर्देश कुछ भी नहीं दिया गया है, शिक्षक अपने विवेकानुसार अंक सूची बना रहे हैं, परीक्षा और उसके बाद मूल्यांकन, मूल्यांकन ऐसा की शिक्षको को अधिकारी द्वारा मूल्यांकन केंद्रों में बंधक बनाकर काम करवाया गया,

कुछ विकास खण्ड शिक्षा अधिकारियों ने तो ऐसा आदेश निकाला कि प्रतिदिन कम से कम 100 उत्तर पुस्तिका को जांच कर ऑन लाईन करने का कठोर हिदायत तथा आदेश से पहले छुट्टी नही, अभी 30 मई तक मार्कशीट रिजल्ट देने हेतु जबरदस्त दबाव बनाया जा रहा है जबकि आज तक बच्चों के मूल्यांकित अंको का ऑन लाइन किया हुआ जानकारी को सुधारा तक नहीं गया है।

छत्तीसगढ़ शासन का स्पष्ट निर्देश 1 मई से 16 जून

तक स्कूल बंद रखने का था किंतु आज तक शिक्षकों का ग्रीष्मकालीन अवकाश नहीं हो पाया है लगता है डेढ़ महीने बच्चों के साथ मिडिल प्राइमरी स्कूल के छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों की छुट्टी पर सबकी नजर लग गई। राज्य सरकार को चाहिए कि उलूल-जुलूल आदेश देकर शिक्षकों को मानसिक तनाव देने के बजाय इस समस्या का हल स्थायी रूप से ढूंढा जाए ताकि बच्चों के मानसिक विकास तथा भविष्य पर कोई असर न डाल सके।

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