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केंद्र की नई सरकार में… निर्णायक भूमिका में रहेंगे नवीन पटनायक,

केंद्र की नई सरकार में…               निर्णायक भूमिका में रहेंगे नवीन पटनायक,

नई दिल्ली से आलोक मोहन/रागिब अली एवं भुनेश्वर से प्रदीप लेंका

तकरीबन 20 साल पहले जनता दल से अलग होकर जिस समय दूसरी जनता दल का गठन किया गया था उस समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि उड़ीसा के सबसे कद्दावर नेता बीजू पटनायक के पुत्र नवीन पटनायक को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, अकस्मात घटी घटनाएं इस बात को साक्षात गवाही दे रही थी की बीजू के बाद पार्टी का कौन कमान संभालेगा, इसको लेकर तत्कालीन समय में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे खासकर तब जब जानकी बल्लभ पटनायक जैसे लोग कद्दावर नेता कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं में गिने जाते रहे हैं बीजू बाबू की मौत के बाद पत्रकारिता से राजनीति में आए नवीन पटनायक को उस समय लोग नौसिखिया राजनेता करार देते थे इस बात में कुछ हद तक सच्चाई थी लेकिन नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही उड़ीसा प्रदेश को ना केवल बेहतरी की तरफ ले जाने का काम किया बल्कि बेहतर प्रशासन के जरिए उड़ीसा प्रदेश को देश के सबसे बेहतर राज्यों में तब्दील कर दिया।

एक समय ऐसा भी था जब उड़ीसा में बेरोजगारी भूखमरी तंगहाली चरम पर थी। वहां के लोग दाने- दाने के लिए मोहताज थे, और पानी पीने के लिए भी नहीं होता था कालाहांडी जैसे इलाकों में लोग भुखमरी की वजह से त्राहि-त्राहि कर रहे थे, कहा तो यह भी जाता है कि तत्कालीन समय में कालाहांडी के लोग पेट भरने के लिए घास और तमाम जंगली चीजों का उपयोग करते थे. आदिवासी बहुल राज्य होने के नाते जब इस तरह की घटनाएं सामने आने लगी तो उड़ीसा राज्य देश की राजधानी में भी सुर्खियों में आने लगा, राजनीति के दियावान जंगल में एक अपनी अलग पहचान दिलाने का काम गत 20 वर्षों में वहां के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जो किया है वह उड़ीसा में जा कर के भली-भांति देखा जा सकता है। शायद यही वजह है भाजपा के तमाम बड़े नेताओं द्वारा पैसे के बलबूते पर रैलियां आयोजित करने तथा मतदाताओं को खरीद फरोख्त कर सत्ता का सपना भी भाजपा का पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। इस बाबत बीजू जनता दल के एक वरिष्ठ नेता का मानना है इस चुनाव में भाजपा ने जिस तरह से पैसों का प्रलोभन दिखाकर मतदाताओं को रिझाने का काम किया है उससे भाजपा का फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है गरीब लोगों को लगता है कि भाजपा ने मुझे खरीदने की कोशिश की है, इसका सीधा फायदा अप्रत्यक्ष रूप से नवीन पटनायक को हुआ है अब तक के जो विश्लेषण हुये हैं , वह चुनाव सर्वेक्षण से पता चलता है की नवीन पटनायक की पार्टी विधानसभा चुनाव के साथ- साथ लोकसभा सीटों में भी अपनी पांचवी बार वापसी करने जा रहे हैं अगर वह ऐसा कर जाते हैं, तो पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बाद उड़ीसा राज्य में सबसे ज्यादा वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने का श्रेय नवीन पटनायक हो जाएगा यूं तो विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ही मुकाबले में थी लेकिन कई ऐसे क्षेत्र रहे हैं जहां पर बीजू जनता दल का नवीन पटनायक का ही वर्चस्व रहा है, नवीन पटनायक के बारे में आम जनता का यह मानना है कि वह साधारण से कपड़ों में रह कर भी बड़े-बड़े काम कर जाते हैं, कल तक यह माना जाता रहा है बीजू जनता दल का झुकाव राजग की तरफ होगा लेकिन जिस तरह से भाजपा ने चुनाव में पैसों का खेल खेला उससे तत्कालीन समय भले ही नवीन पटनायक ने कुछ ना कहकर खामोशी से से सब कुछ सहन करते रहे हो, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की भूमिका निर्णायक साबित होने जा रही है।

इंडियन जंग को मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र में जिस किसी गठबंधन की सरकार बनेगी नवीन पटनायक की भूमिका रहेगी,अभी तक जो रुझान आ आ रहे हैं उसके मुताबिक कहा जा सकता है विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल को दो तिहाई से ज्यादा बहुमत मिलने जा रहा है जबकि लोकसभा में 16-17 सिटें नवीन के खाते में आ सकती है कांग्रेस व भाजपा भाजपा को दो दो सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है शायद यही वजह है फैनी तूफान के बाद तमाम सियासी दलों ने नवीन पटनायक पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं अब देखना यह है नवीन का झुकाव किसकी तरफ होगा। यह 23 मई की बाद ही पता चल सकेगा लेकिन इतना तो तय है अन्य क्षेत्रीय पार्टियों की तरह बीजू जनता दल के मुखिया व उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की निर्णायक भूमिका रहेगी।

लेकिन जिस तरह से एक्जिट पोल आये हैं उनसे ये अंदाजा नही लगाया जाना चाहिए कि भजापा पूर्ण बहुमत से आ रही है, बल्कि उसे भी अपने कुनबे को बढ़ाने के लिए दोस्तों की तलाश करनी पड़ेगी, जबकि यूपीए गठबंधन में कई एनडीए घटक दल के सांसद यूपीए में शामिल हो सकते हैं और केंद्र में नई सरकार को तामिल करवा सकते हैं यूपीए में देश का नेतृत्व कौन करेगा यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि वर्तमान सरकार को आने से रोकना है जबकि एनडीए में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा अमित शाह भी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं गत दिनों दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नरेंद्र मोदी के हर सवालों का जवाब जिस तरह से अमित शाह ने दिया उससे तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है की मोदी की जगह पर अमित शाह ज्यादा पावरफुल है अब देखना यह है की 23 मई के चुनाव परिणाम में एनडीए का पलड़ा भारी रहता है या फिर यूपीए का।

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