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‘जूसतजु’जिसकी थी वो न मिली क़लम की स्याही मिली स्याही से रंगे पन्नों पर गैंगवारी मिली..!!!

‘जूसतजु’जिसकी थी वो न मिली क़लम की स्याही मिली स्याही से रंगे पन्नों पर गैंगवारी मिली..!!!

मोदी को सलाम..?

६ वें दौर में मतदान पहुँच गया है ऐसे में मामला राजनीतिक न होकर साहित्यिक हो गया है राजस्थान में गैंग रेप हुआ चूँकि कांग्रेस वहाँ सरकार में है इसलिये तवा गर्म हो गया है,हमारी बेटी के साथ जो हुआ वह निंदनीय है दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिये और उस दलित की बेटी को देश अपनी बेटी मानता है भावनायें राजनीति से परे होती हैं,इस पर राजनीति नही होनी चाहिये.,,
नरेंद्र मोदी ने चण्डीगढ़ से जिसे लोकसभा चुनाव में मैदान में उतारा है उन्होंने एक बार कहा था बलात्कार होते रहते हैं कहना होगा वे नामचीन अभिनेत्री हैं किरण खेर के तौर पर हम उन्हें जानते और पहचानते हैं गेंद जब भाजपा सरकार के पाले में थी तब किरण ने ऐसा कहा था अब,की किसी सरकार में ऐसा हुआ तो मोदी ने कह दिया है कि कांग्रेस ने दबाया अलवर जैसा भयंकर कांड..! हुज़ूर,अभी घटना हुए जुम्मा जुम्मा आठ दिन हुए नहीं हैं और मामला दब भी गया.,?

ख़ैर,जाने दो मोदी है तो मुमकिन है..,

दूसरी बात मोदी ने लेखकों,साहित्यकारों को निशाने पर ले लिया है उन्होंने कहा है अब, कहाँ है अवार्ड वापसी गैंग..?
लिखना होगा कि अब,लेखक निशाने पर हैं अचरज होता है जिन्हें पूर्व की सरकारें सिर आँखों पर बिठाती रही हैं वे,इस काल और खंड में गौरी लंकेश बना दी जा रही हैं पढ़ा लिखा समाज जिसके पास entire political science की मास्टर डिग्री अमूमन नहीं होती है उसका मानना है कि लोकतंत्र तब कलंकित होता है जब क़लम राजनीति के नृशंस निशाने पर होती है ध्यान रहे राजनीति गर्म तवे पर रोटी सेंकती है पर,क़लम तो तो ठंडे काग़ज़ पर धारा बन कर बहती है सवाल तो यही है कि मोदी को क़लम की तासीर का ज्ञान है कि नहीं इस पर बाद में कभी बहस की जाएगी पर,क़लमकार और बुद्धिजीवी का कोई गैंग नहीं होता है वह,टपोरी या तड़ीपार नहीं होता है..,इस पर चर्चा ज़रूर होनी चाहिये..,
प्रधान सेवक को अपने वे शब्द वापस लेने चाहिये जो क़लम की धार को धारा बनने से रोकते हों ज़िम्मेदार लोकतंत्र इसी तरह से आगे बढ़ता है अन्यथा वह हाशिये पर धकेल दिया जाता है..,जब क़लम पर राजनीति तलवार बनकर लटकी हो तो लिखना होगा के-
दुश्मन से ख़तर
वालों लम्हे पे
नज़र रखना
हर,लम्हा ए
हस्ती भी’तलवार’
का पानी है..,

गौरी लंकेश की हत्या और सत्ता के शर्मनाक चाल चलन के बाद जो देश के हालात हुए थे उस पर बौद्धिक धरा के लोगों ने विरोध प्रकट किया था अपने अवार्ड मोदी सरकार को लौटा दिये थे..,देश,के जो हालात बन पड़े हैं उस पर लिखना होगा कि-
दार (फाँसीं के तख़्त)
पर लटकी हुई
है,जाने कब से
ये जमीं और
सर पे ‘आसमाँ’
एक सिरफिरा
जल्लाद है..,

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