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राजीव तो गोलियाँ सीने में सहेज कर जिये जा रहे हैं..और आप हैं हुज़ूर कि गालियाँ खा कर शहीद हुए जा रहे हैं..!!!

राजीव तो गोलियाँ सीने में सहेज कर जिये जा रहे हैं..और आप हैं हुज़ूर कि गालियाँ खा कर शहीद हुए जा रहे हैं..!!!

*नितिन राजीव सिन्हा*

कुरुक्षेत्र जहाँ बड़ी लड़ाइयाँ लड़ी गईं ख़ून बहा कर “मेरा रंग दे बसंती चोला..गीत गाते हुए देश के चरणों में शीश नवाजे गये..ख़ैर,ये बीते हुए कल की बात है लेकिन आज देश के पराक्रमी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की पीड़ा वहीं सामने आई कि कांग्रेसी उन्हें गंगू तेली कहते हैं नि संदेह राजा भोज का जीवन जीने वाले ब्रांडेड पीएम को यह नागवार गुज़रा होगा,जिस पर लिखना होगा कि
आलम यह है कि
सीने में गोलियों
का ज़ख़्म छुपाए
जो मर गये वो,
क्या कर गये..!!!
साहब तो गालियाँ
खाकर शहादत
को प्राप्त हो गये..!
चंद बूँद आँसू
हम उधार देते
हैं थोड़ा आप
रोते हैं थोड़ा
हम,रो लेते हैं..,
मोदी ने द्रवित होते हुए कहा मुझसे पूछा गया कि मेरे पिता कौन हैं,मेरी माँ को गाली दी,मुझे पागल कुत्ता कहा,किसी ने मुझे भस्मासुर कहा और गंदी नाली का कीड़ा भी कह दिया..प्रधान मंत्री की वेदना जायज़ है लिखना होगा कि इतना कुछ सुन लेने के बाद मोदी जी जैसे स्वाभिमानी महापुरुष का जीवन दुभर है चूल्लु भर पानी में डुबकी लगाना तय है..,
चुनाव के समय पाँच चरण गुज़र जाने के बाद जिस वेदना का इज़हार मोदी कर रहे हैं इससे लगता है वे अपनी हार स्वीकार कर रहे हैं मतदाताओं की सहानुभूति बटोर रहे हैं..,
मोदी की दशा नगमति विरह वाली बन पड़ी है जिस पर लिखना होगा कि-
गर,नाजनीं के
कहने से
माना बुरा
हो,कुछ
मेरी तरफ़
देखिये मैं
नाजनीं सही..,
राजीव गांधी पर जिस तरह उनकी मृत्यु के वर्षों बाद मोदी टूट पड़े हैं उससे मोदी की युद्धकला का दुनिया लोहा मान रही है राजीव इस हाल में गर,कुछ कह पा रहे होंगे तो वो इस तर्ज़ पर हो सकता है-
सीने के ज़ख़्म
पाँव के छाले
कहाँ गये
ये,हुस्न
तेरे चाहने
वाले कहाँ
गये..? तीन
रंग की चुनरी
तीन रंग का
साफ़ा था..,
मौत का कारवाँ
मेरा दस्तूर था
टुकड़ों में बँटा
मेरा देह था
चुन लिया
अपनों ने
पर,क्या वो
मेरा देश न
था..चुनरी
में लिपटी मेरी
माँ इंदिरा थीं
सीने में ३४
ज़ख़्म थे पर,
सीना ५६” न
था..वो,मौत
का मंज़र था
अब,सितम का
सागर है..मैं
राजीव हूँ
राजीव गांधी
दूर हूँ दुनिया
के दस्तूर से
दूर..पर,मेरे
ज़ख़्म कुरेदने
वाले योद्धा
कौन हैं..!!!

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