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निलिमा मिश्रा के यात्रा संस्मरण.., पतझड़ के रंग

निलिमा मिश्रा के यात्रा संस्मरण..,   पतझड़ के रंग

ईश्वर सचमुच तू सबसे बड़ा चितेरा है।तूने अपनी तुलिका से प्रकृति मे इतने रंग भरे हैं।रंगो का इतना अद्भुत इतना सुंदर संयोजन,वाह।
मैं जब मिडिल क्लास मे थी ।अब आप फिर सोचेंगे कि मेरी सारी सोच,मेरी इच्छाएं बचपन से ही क्युं हैं।लेकिन सचमुच मैं जब छोटी थी।उस समय धर्मवीर भारतीजी द्वारा संपादित साप्ताहिक पत्रिका “धर्मयुग”हमारे यहाँ आती थी।उसमें मैंने चित्र देखा था कि पेड़ मे पत्तों के रंग गुलाबी, लाल,सिंदूरी, नारंगी और पीले थे।नीचे झड़े हुये पत्ते भी रंगबिरंगे, और उन्हें निहारते विदेशी पर्यटक।वो मेरे जेहन मे बैठा था।मैं हमेशा सोचती कि कहाँ होगी इतनी खूबसूरत जगह।क्या मैं कभी देख पाऊँगी।लेकिन मैने पहले भी कहा है कि प्रकृति कभी कभी मुझ पर बहुत मेहरबान हो जाती है।दो साल पहले मेरी बेटी ने अमेरिका से कुछ ऐसी ही तस्वीरे़ भेजी ।जिन्हें देखकर मैं खुशी से उछल पड़ी।अरे इसीको तो मैं कब से ढूंढती थी।मेरी बेटी ने बताया कि ये फाल कलर है मम्मी और ये पतझड़ के पहले होता है।जिसमें पत्तियों के रंग बदल जाते हैं।ये सब देखने के लिए मैं अपने पतिदेव ,दामाद और बेटी की आभारी हूँ।
खैर हम शुक्रवार की शाम साढ़े सात बजे न्युहैम्पशायर जाने के लिये निकले।न्युयार्क, कनेक्टिकट राज्यों को पार करते करीब साढ़े ग्यारह बजे स्प्रिंग फील्ड टाऊन पहुंचे।वहां रात्रिविश्राम के पश्चात सुबह सात बजे हम आगे निकले।बाहर बादल घिरे हुये थे।लग रहा था कि बारिश हो जायेगी और हम फाल कलर ठीक से देख नहीं पायेंगे।
लेकिन नौ बजते बजते अच्छी धूप खिल गई .रास्ता क्रमशः ऊँचा होता जा रहा था।हमारे चारों ओर पहाड़ दिख रहे थे।फाल कलर दिखने लगा था।मैं बहुत खुश हो रही ।बेटी ने कहा अभी से इतनी खुश मत होइए मम्मी ,आगे और देखिये।
न्युहैम्पशायर एक छोटा सा पर बेहद खूबसूरत राज्य है।सुंदर पहाड़,जंगल और सड़क के किनारे चलती इठलाती, बल खाती पहाड़ी नदी।पूरा जंगल लाल,पीला,नारंगी।जैसे आग लगी हो और जंगलों, पहाड़ो से रंगीन लपटें उठ रही हों।
जगह जगह सैलानियों की भीड़ और इतने, इतने, इतने ज्यादा सुंदर दृश्य ।कि शब्द बेजुबान हैं।सब कुछ “गूंगे के गुड़”जैसा है।जिसे सिर्फ अनुभव किया जा सकता है।शब्दों मे बयां नहीं किया जा सकता।
पूरे रास्ते लाल,सिंदूरी, नारंगी, पीले पेड़ों से आच्छादित ।फिजाओं में सिहरन, नमी,और भीनी सी खुशबू।कहीं साथ साथ बहती नदी,कहीं खूबसूरत झील।इन सबको घेरे हुये पतझड़ के रंग।
सारा दिन इतनी खूबसूरती निहारते बीती।शाम को हम क्रैम्पटन टाऊन ,होटल पहुंचे।जहाँ हमें रात गुजारनी थी।होटल भी इतना खूबसूरत।बाहर भी लाल,पीले पत्तों वाले पेड़।सुबह जब हम वापस आने के लिये निकले तो होटल और उसके आसपास की सुंदरता को देखते ही रह गये।होटल थोड़ी ऊँचाई पर और नीचे लगी हुई सड़के किनारे फिर रंगबिरंगे पत्तों वाले पेड़।पेड़ के नीचे रखा हुआ बेंच।सब कुछ किसी खूबसूरत पेंटिंग की याद दिलाता हुआ।

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