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एक बार फिर से साबित हुआ राफेल में चौकीदार ही चोर है

एक बार फिर से साबित हुआ राफेल में चौकीदार ही चोर है

मोदी सरकार राफेल घोटाले की है गुनाहगार – कांग्रेस़

परत दर परत हो रहे घोटाले के पर्दाफाश से चोरी हुयी उजागर

चित्रदुर्ग की सभा में मोदी जी कालेबक्से में राफेल का पैसा लेकर गये क्या?

रायपुर/14 अप्रैल 2019। राफेल रक्षा सौदों की परतें दर परतें खुलने के साथ ही यह बात साफ होते जा रही है कि चौकीदार ही चोर है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि फ्रांस के जाने माने अखबार ‘लेमोंडे’ के द्वारा किये गये खुलासे फ्रांस सरकार ने नरेन्द्र मोदी की फ्रांस यात्रा के बाद तथा राफेल विमानों के सौदे के बाद अनिल अंबानी की कंपनी ‘‘रिलायंस अटलांटिक फ्लेग फ्रांस को 143 मिलियन यूरो की कर देनदारी को कम कर मात्र 7.6 मिनियन यूरो कर दिया है। फ्रांस की सरकार ने अंबानी की कंपनी को 1123 करोड़ की छूट दे दी। बड़ा सवाल यह उठता है कि यह छूट किसके कहने से दी गयी थी। 2010 की इस कर देनदारी को फ्रांस सरकार ने 2015 में ही मोदी के फ्रांस दौरे के बाद क्यों माफ किया?

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि राफेल विमान की खरीददारी के सौदे के तुरंत बाद की गयी यह छूट स्पष्ट करती है कि मोदी ने इस रक्षा सौदे की आड़ में अपने मित्र अंबानी को फायदा पहुंचाया है। भाजपा की केन्द्र सरकार और मोदी जी ने राफेल विमान रक्षा सौदों में बड़ी गड़बड़ी कर देश के खजाने को हजारों करोड़ का चूना लगाया है। यूपीए कांग्रेस सरकार ने 36 राफेल विमान प्रति विमान 526.10 करोड़ की लागत पर लिए थे, लेकिन मोदी सरकार ने 36 विमान प्रति विमान 1677.70 करोड़ रुपए में खरीदे यह बात राफेल विमान बनाने वाली कंपनी डसाल्ट एविएशन की 2016 की वार्षिक रिपोर्ट से स्पष्ट है।

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा है कि भारतीय जनता पार्टी बताएं 40205 करोड रुपए उसी विमान, उसी तरह के विमान की खरीदी में क्यों ज्यादा खर्च किए गए? राफेल निर्माता डसाल्ट एविएशन ने 48 राफेल विमान 2015 में 1319.80 करोड़ प्रति विमान की कीमत पर बेचे तो फिर मोदी सरकार बताएं कि भारत को प्रति राफेल विमान 1677.70 करोड़ की राशि क्यों चुकानी पड़ी? स्पष्ट है कि ओमान और कतार के मुताबिक मुकाबले भारत को प्रति विमान 350.90 करोड़ की राशि ज्यादा देनी पड़ी। राफेल मामले की जांच के लिये संसदीय समिति के गठन से मोदी सरकार इसीलिये लगातार बच रही है क्योंकि सरकार सीएजी और अन्य संसदीय स्थाई समितियों को राफेल विमानों का दाम बताने के लिए बंधनकारी है। इसके बावजूद मोदी सरकार ने राफेल डील में हुए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए राफेल विमानों की कीमत को उजागर नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट को भी जानकारी देने में मोदी सरकार बहानेबाजी और हीलाहवाला करती रही। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले की फिर से सुनवाई और जांच के आदेश से राफेल मामले की सच्चाई जनता के सामने जरूर आयेगी।

चित्रदुर्ग की सभा में पहुंचे मोदी जी के हेलिकॉप्टर से उतरे कालेबक्से पर प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा है कि मोदी जी बतायें, इस कालेबक्से में राफेल की काली कमाई का पैसा था क्या? चित्रदुर्ग की सभा में मोदी जी कालेबक्से में राफेल का पैसा लेकर गये क्या?

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