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आज विश्व होम्योपैथी दिवस है..,जन्मदाता डॉ॰ क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हानेमान (जन्‍म 1755-मृत्‍यु 1843 ईस्‍वी) पर हिमांशु कुमार का लेख

आज विश्व होम्योपैथी दिवस है..,जन्मदाता डॉ॰ क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हानेमान (जन्‍म 1755-मृत्‍यु 1843 ईस्‍वी) पर हिमांशु कुमार का लेख

हिमांशु कुमार[समाज सेवी]

होम्योपैथी इलाज करने का एक तरीका है

इसका जन्म जर्मनी में हुआ

डॉक्टर हैनिमैन को इसका शुरुआती डॉक्टर माना जाता है

होम्योपैथिक का एक सिद्धांत तो यह है कि जो तत्व बीमारी पैदा करता है उसी तत्व का बहुत छोटा सा हिस्सा दवाई का काम करेगा

इसलिए होम्योपैथी में बहुत सारी दवाइयां बनाने में उन तत्वों का इस्तेमाल भी किया जाता है जिन्हें ज़हर माना जाता है जैसे आरसेनिक बैलाडोना वगैरह

होम्योपैथिक का दूसरा सिद्धांत है की इलाज बीमारी का नहीं इंसान का किया जाता है

इसलिए कोई बीमारी किसी एक इंसान को होगी तो उसे दूसरी दवाई दी जाएगी

वही बीमारी अगर किसी दूसरे इंसान को होगी उसे दूसरी दवाई असर करेगी

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर इंसान की मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और बौद्धिक हालत अलग-अलग होती है

इसलिए होम्योपैथी में सिर्फ बीमारी देखकर दवाई नहीं दी जाती बल्कि मरीज से बहुत देर तक बात करके उसकी मनोवैज्ञानिक और शारीरिक लक्षणों को बहुत विस्तार से समझा जाता है और फिर दवाई तय करी जाती है

होम्योपैथी का मेरा अपना अनुभव काफी अच्छा है

एक दफा मेरे चेहरे पर मस्से हो गए शेव करते समय मस्से छिल जाते थे और खून बहने लगता था

एलोपैथिक एंटीबायोटिक दवाई और ऑइंटमेंट वगैरा कोई असर नहीं कर रहे थे

मैं अपने पिताजी के साथ विनोबा जी के आश्रम पवनार गया था

वहां से लौटते समय पिताजी ने कहा वर्धा में एक होम्योपैथिक डॉक्टर है चलो उन्हें दिखा देते हैं

वर्धा में होमियोपैथ ने मुझे होम्योपैथिक दवाई की शीशी दे दी

मैंने दवाई की कुछ गोलियां वहीं मुंह में डाल ली और मैं स्टेशन जाकर दिल्ली जाने वाली ट्रेन में बैठ गया

अगले दिन दिल्ली पहुंचते-पहुंचते मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे मस्से में कुछ सूखापन आया है

मैंने हाथ फेरा तो कुछ पपड़ी जैसी महसूस हुई

2 दिन के अंदर सारे मस्से सूख गए और तीन-चार दिन में सूख कर झड़ गए और पूरा चेहरा साफ हो गया

उसके बाद कभी दोबारा मुझे वह समस्या नहीं हुई

जब मैं और मेरी पत्नी वीणा बस्तर में काम करने गए तो हमने देखा वहां आदिवासी लोग बहुत बीमार हैं

मलेरिया डायरिया डिसेंट्री वगैरा बहुत फ़ैली हुई थी

हमने बीमार आदिवासियों की मलेरिया की स्लाइड बनाना उन्हें अस्पताल पहुंचाना और दवाई बांटने का काम शुरू किया

मेरे पिता ने मुझे सुझाव दिया कि मैं बायोकेमिक दवाइयां भी इस्तेमाल करूं

पिताजी बायोकेमिक दवाइयां परिवार के सदस्यों और अड़ोस पड़ोस में देते रहते थे

बायोकेमिक इलाज भी होम्योपैथी की एक शाखा है

इसके संस्थापक डाक्टर सुशलर थे

डॉक्टर सुशलर ने एक शव को जलाया और उसकी राख का परीक्षण किया

राख में उन्हें 12 तरह के नमक मिले

वह 12 नमक ही बायोकेमिक 12 दवाइयां बनी

इसलिए बायोकेमिक इलाज को ट्वेल्व टिशु रेमेडी भी कहते हैं
बस्तर में बायोकेमिक दवाओं के बहुत ही अच्छे परिणाम आए

हमारे आश्रम के नजदीक के पारे में रहने वाली एक महिला कई साल से पेट दर्द से परेशान रहती थी

वह गांव से 10 किलोमीटर दूर चल कर दंतेवाड़ा शहर तक दूध पहुंचाने जाती थी

और लौटकर घर में आकर पेट दर्द से परेशान होकर उल्टी होकर पेट दबा कर लेट जाती थी

उनके परिवार के लोगों ने आकर मुझे बताया

मैंने उन्हें बायोकेमिक दवाई दी

कुछ हफ्ते के इलाज के बाद वह महिला बिल्कुल ठीक हो गई

इसी तरह एक बार हमने गाँव में घूमते हुए एक आदिवासी महिला को देखा

उस महिला के हाथ में घाव था

और वह घाव इतना गहरा था कि उसकी हड्डी तक सड़ गई थी

हम उस महिला को सरकारी अस्पताल ले गए

डॉक्टरों ने कहा कि गैंगरीन हो गया है हाथ कोहनी से काटना पड़ेगा

वह महिला डरकर अस्पताल से घर चली गई और अगले दिन हमारे आश्रम में आकर बैठ गई

उस महिला ने मुझसे कहा कि आप ही इसमें पट्टी कर दो

मैंने उस महिला की पट्टी करना और साथ में बायोकेमिक दवाइयां देनी शुरू करीं

कुछ हफ्तों बाद उस महिला ने आना बंद कर दिया

मैंने करीब 1 साल बाद अपने साथियों से पूछा कि उस महिला का क्या हुआ ?

मेरे साथियों ने बताया वह महिला बिल्कुल ठीक हो गई है और अब आराम से दोनों हाथों से खेती-बाड़ी करती है

इसी तरह मेरी पत्नी को कान के भीतर इनर इयर में दर्द शुरू हुआ

रायपुर में डॉक्टरों ने नशीली दवाएं देनी शुरू कर दीं

उसके बाद जब छत्तीसगढ़ छोड़कर हमें दिल्ली आना पड़ा तो एम्स में डॉक्टरों ने दवाई की मात्रा बढ़ा दी
उससे मेरी पत्नी को नशा जैसा होने लगा

परेशान होकर मेरी पत्नी वीणा ने मुझसे इसका हल पूछा मैंने कहा सारी एलोपेथिक दवाएं बंद कर दो

और मैंने बायोकेमिक दवाई देनी शुरू करी

तब से आज तक वीणा बिल्कुल ठीक है और अब बायोकेमिक दवाई भी खाने की जरूरत नहीं पड़ती

इसी तरह वीणा की मम्मी यानी मेरी सास की उंगलियां अर्थराइटिस से टेढ़ी हो गई थी

मैंने उन्हें बायोकेमिक दवाई देनी शुरू करी और उनकी उंगलियां बिल्कुल सीधी हो गई और उसके बाद वह आराम से काम करने लगीं

भारत में और दुनिया में बहुत सारी इलाज की पद्धतियां हैं

उन पद्धतियों को इज्जत से देखने की जरूरत है उनमें नई शोध की जरूरत है और वैज्ञानिक ढंग से उनका इस्तेमाल करने की जरूरत है

भारत में होम्योपैथी की पढ़ाई के बहुत सारे कॉलेज हैं और बहुत सारे होम्योपैथिक डॉक्टर देश में काम कर रहे हैं

बच्चों में और ऐसे लोग जो ज्यादा पैसा खर्च नहीं कर सकते उनके लिए यह पद्धति बहुत ही मुफीद है

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