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नंदकिशोर जी आप के पास ना तो पैसा है और न ही आपकी जाती की आबादी (चौधरी चरण सिंह)

नंदकिशोर जी आप के पास ना तो पैसा है और न ही आपकी जाती की आबादी (चौधरी चरण सिंह)

1977 में इमरजेंसी के बाद लोकसभा चुनाव जनता पार्टी के बैनर तले हो रहे थे, उस समय लोकसभा का टिकट उन तमाम लोंगो को दिया गया था जो इमरजेंसी का विरोध करते हुए जेल के अंदर रहे या बाहर, लेकिन कुछ लोग अपनी परिवारक समस्याओं को लेकर इमरजेंसी के दौरान छुप कर रहते थे, जिससे कि उनके परिवार के लड़कों बच्चों को भूखों मरने की नोबत न आये। इनमे से प्रसिद्ध समाजवादी तथा डॉ राममनोहर लोहिया के 10 वर्षों तक निजी सचिव रहे श्री नंदकिशोर भी थे,वे बताते थे की छुपने के लिए वे मुज्जफरनगर के एक जाट परिवार के यंहा शोरों में रहते थे,और उनके खेती बाड़ी का काम देखा करते थे, जब इमरजेंसी के बाद लोकसभा चुनाव का ऐलान हुआ तो नंदकिशोर जी ने भी रायबरेली से चुनाव लड़ने का आवेदन किया तत्कालीन समय में कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे तथा कद्दावर नेता देवराज अर्श ,बाबु जगजीवन राम, दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे तथा जाटों के सबसे बड़े चौधरी ब्रह्मप्रकाश, बाद में प्रधानमंत्री बने मोरारजी देसाई व कई लोग चाहते थे श्री नंदकिशोर को रायबरेली सेबश्री इंदिरा ग़ांधी के खिलाफ टिकट दिया जाए,क्योंकि 1957 के लोकसभा चुनाव में पंडित जवाहरलाल नेहरू के दामाद तथा इंदरा गांधी के पति श्री फिरोज गांधी को करारी चुनोती दी थी, श्री नंदकिशोर जी बताते थे कि फिरोज गांधी अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू के दामाद नही होते तो चुनाव हार जाते। उस समय रायबरेली में एक नारा लगता था कि एक तरफ पंडित जवाहरलाल नेहरू का जमाई तो दूसरी तरफ डॉ राममोहन लोहिया का नंदकिशोर नाईं,,इस नारे का परिणाम यह हुआ कि 1957 के रायबरेली लोकसभा चुनाव जिले की कितनी भी छोटी छोटी प्रजा जातियां थी,इनमें नाई, कुम्हार, बड़ी ,काछी, गडरिया, अंसारी, आदि नंदकिशोर जी के पक्ष में एकजुट हो गए थे। इसी को मद्देनजर रखते हुये श्री नंदकिशोर जी ने जनता पार्टी से रायबरेली से लोकसभा का टिकट मांगा था। जब यह बात चौधरी चरण सिंह के पास पहुँची तो उन्होंने श्री नंदकिशोर जी को बुलाया, बताते हैं कि चौधरी चरण सिंह ने नंदकिशोर जी कहा कि आप को टिकट कैसे दे दूं क्योंकि आपके पास न तो पैसा है,और न तो आपकी जाती[नाई] वँहा पर ज्यादा है परिणाम स्वरूप रायबरेली से जनता पार्टी ने राजनारायण सिंह को लोकसभा का टिकट दे दिया गया जो चुनाव में श्रीमती इंदिरा गांधी को परास्त करने में कामयाब रहे। बता दे इसके बाद से ही श्री नंदकिशोर जी का समाजवादीयों से मन उचट गया व बाद में वे किसी भी दल से मरते दम तक लोकसभा व विधानसभा का टिकट नही मांगा ,28 जुलाई 2003 को उनके गांव ग्राम,पोस्ट, ओसियां , बीघापुर, जिला उन्नव में निर्धन हो गया। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सिंद्धान्तों व वसूलों से मरते दम तक समझौता नही किया।

[प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक तथा लोहिया जी 10 वर्षो तक निजी सचिव रहे स्वर्गीय श्री नंदकिशोर जी के पुत्र वरिष्ठ पत्रकार आलोक मोहन से बातचीत पर आधारित]

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