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बस्तर के आदिवसियों की अधिग्रहित जमीन वापस लौटने के छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले की गूंज सात समंदर पार तक- डॉ. विनय

बस्तर के आदिवसियों की अधिग्रहित जमीन वापस लौटने के छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले की गूंज सात समंदर पार तक- डॉ. विनय

इस ऐतिहासिक फैसले पर ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ लार्डस करेगी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सम्मानित

चिरमिरी। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में टाटा सयंत्र लगाने के लिए स्थानीय आदिवासियों की अधिग्रहित ज़मीन को लौटाने की गूंज केवल भारत मे ही नही बल्कि सात समंदर पार विदेशों में भी हो रही है। आगामी 19 मई को ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।

इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ.विनय जायसवाल ने भी मुख्यमंत्री के प्रति हृदय से आभार प्रकट कर उनके कार्य को सराहा है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले के साथ-साथ नरवा, गरवा, घुरवा, औऱ बाड़ी के कांसेप्ट को अमलीजामा पहनाने पर प्रशस्ति पत्र भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा व ऐतिहासिक निर्णय लिया। बस्तर में टाटा सयंत्र लगाने के नाम पर आदिवासियों की ज़मीन अधिग्रहित की गई थी लेकिन टाटा ने जमीन पर न तो प्लांट लगाया और न ही पूर्व की भाजपा सरकार आदिवासियों की ज़मीन को वापस किया। डॉ. विनय ने कहा कि ये राज्य की पहली सरकार है जिन्होंने आदिवासियों की समस्याओं को गंभीरता पूर्वक लेते हुए इस तरह का सराहनीय कार्य किया। यह पहला मौका होगा कि छत्तीसगढ़ के कोई मुख्यमंत्री इंग्लैंड के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे।

अफ़सर अली की रिपोर्टिंग

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