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सोशल मीडिया में मचा धूम,जशपुर जिला के पुलिस विभाग में स्थानांतरण पर उठ रहे सवाल

सोशल मीडिया में मचा धूम,जशपुर जिला के पुलिस विभाग में स्थानांतरण पर उठ रहे सवाल

जशपुर/पत्थलगांव। स्थानांतरण का आदेश तो जारी कर दिया गया परंतु इस पर अब तक अमल नहीं हुआ है। आचार संहिता लागू होने की आड़ में स्थानांतरण आदेश को निरस्त किए जाने की चर्चा भी होने लगी है। स्थानांतरण आदेश सामने आने के बाद अमल करने से पहले ही इसे निरस्त करने से इस पर सवाल उठने लगे हैं।
मामला पुलिस विभाग का है। जानकारी के अनुसार शनिवार को पुलिस अधीक्षक द्वारा पुलिस महकमे में फेरबदल करते हुए कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इधर से उधर करने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के मुताबिक स्थानांतरित हुए पुलिसकर्मियों में कांसाबेल थाना प्रभारी अकीक खोखर,आर जी एस गौतम, पत्थलगांव थाना प्रभारी ओम प्रकाश ध्रुव, एसआर कुंजाम,जीवन जांगड़े, टेकराम सारथी, डाकेश्वर सिंह, अपलेजर खेस शामिल हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक जशपुर के द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत जशपुर जिले में थाना प्रभारियों को फिर से एक बार इधर से उधर कर पुलिस व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की मंशा से किया गया है। उधर शनिवार को आदेश जारी होने के बाद रविवार तक भी इस पर पूरा अमल नहीं हुआ है। बताया जाता है कि आदेश के अनुक्रम में सहायक उपनिरीक्षक डाकेश्वर सिंह समेत कई अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने तो नवीन स्थान पर पदस्थापना प्राप्त कर ली है परंतु पत्थलगांव थाना प्रभारी ओमप्रकाश ध्रुव और कांसाबेल थाना प्रभारी अकीक खोखर का स्थानांतरण नहीं हो सका है। इसे लेकर सोशल मीडिया में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि आदेश जारी होने के बाद से पत्थलगांव थाना प्रभारी ओमप्रकाश धु्रव के स्थानांतरण को लेकर चर्चा का बाजार गर्म था। लोगों का कहना था कि थाना प्रभारी श्री धु्रव को लेकर कई लोगों द्वारा पुलिस अधीक्षक से शिकायतें की गई थीं। माना जा रहा था कि पुलिस अधीक्षक ने इन्हीं शिकायतों के अनुक्रम में पत्थलगांव थाना प्रभारी को स्थानांतरित कर दुलदुला भेजा है। परंतु रविवार बीतते-बीतते उनका स्थानांतरण रूकने की चर्चा आम हो गई। कांसाबेल थाना प्रभारी अकीक खोखर का पत्थलगांव नहीं आना और पत्थलगांव थाना प्रभारी श्री धु्रव का दुलदुला नहीं जाना लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। लोगों के मुताबिक शिकायतों के मद्देनजर थाना प्रभारी का स्थानांतरण किए जाने के बावजूद इसे रोका जाना अपने आप में सवालों को जन्म दे रहा है। उनका कहना है कि पुलिस महकमे में आचार संहिता के मद्देनजर स्थानांतरण निरस्त किए जाने की बात कही जा रही है तो फिर डाकेश्वर सिंह तथा अन्य पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किस आधार पर प्रभावी हुआ जबकि सभी आदेश एक साथ निकाले गए थे। स्वयं के ही आदेश की अवहेलना से विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का यह भी कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेश आचार संहिता लगने के पूर्व जारी हुआ था और यदि अब इसे निरस्त किए जाने का आदेश जारी होता है तो क्या वह आचार संहिता के प्रावधान उस पर लागू नहीं होंगे ? लोगों ने चुनाव आयोग को पूरी स्थिति से अवगत कराने की बात भी कही है।

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