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लोकसभा चुनाव के पहले अनियमित कर्मचारियों में बढ़ी नाराजगी

रायपुर- छत्तीसगढ़ में अनियमित कर्मचारियों द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी गई है। ये कर्मचारी लंबे समय से 62 वर्ष की जॉब सुरक्षा सहित नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। पिछली सरकार में महासंघ ने 23 दिन की प्रान्त व्यापी अभूतपूर्व हड़ताल की थी जिसका असर चौतरफा दिखा था। किंतु तत्कालीन भाजपा सरकार ने इन कर्मचारियों हेतु केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया। इस मुद्दे को तत्कालीन विपक्षी दल कांग्रेस ने लपक लिया । उस समय हड़ताल के मंच पर कई बड़े विपक्षी नेता जैसे भूपेश बघेल,सिंहदेव,कवासी लखमा, छाया वर्मा, ने आकर इनकी माँगो का समर्थन किया। बाद में कांग्रेस ने इनकी माँगो को अपने घोषणा पत्र में सम्मिलित कर लिया जिससे ये कर्मचारी कांग्रेस के पक्ष में आ गए। विधानसभा चुनावों में अनियमित कर्मचारी प्रति विधानसभा 6000 मत रखते हैं, इन कर्मचारियों ने चुनावों के दौरान मेरा वोट उसको,जो नियमित करे मुझको का नारा दिया । इस नारे ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को लाभ पहुँचाया। राज्य के विधानसभा चुनावों में 18 सीटें ऐसी रहीं जहाँ हार-जीत का अंतर 6 हज़ार मत रहे है । वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के हार का अंतर केवल 1 लाख वोटों का था,ऐसे में 2018 के चुनाव में कांग्रेस की जीत में इन कर्मचारियों की महत्ता से इंकार नहीं किया जा सकता। चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहे जिससे अनियमित कर्मचारियों में काफी हर्ष हुआ ,उन्हें लगा की अब संभवत: अच्छे दिनों का आगमन हो पायेगा । लेकिन चुनावों के पश्चात कई दिनों की प्रतीक्षा के बावजूद कांग्रेस ने अपने जान घोषणा पत्र में कर्मचारियो हेतु किये वादे को पूरा नहीं किया। इन कर्मचारियों ने 14 फरवरी को एक विशाल सभा का रायपुर में आयोजन भी किया था जिसमें खुद मुख्यमंत्री का आगमन हुआ ,कर्मचारियों में इस बात की आशा थी की मुख्यमंत्री न केवल जन घोषणा पत्र को अमल में लाने की घोषणा करेंगे बल्कि पडोसी राज्य मध्यप्रदेश की तरह अनियमित कर्मचारियों को 62 वर्ष की जॉब सुरक्षा भी देंगे। किन्तु इस महासभा में बहुत ही चतुराईपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया की वह इस बाबत आयोग गठित करेंगे। आयोग की बात इनकी मांगों को लटकाने जैसा था और ये बात महासंघ को भी समझ आ गई थी। महासंघ ने फिर भी कई बार मुख्यमंत्री से मिल कर आगे की प्रक्रिया का अनुरोध किया पर बात पर शासन की ओर से ज्यादा कुछ नहीं हुआ। इसके पश्चात आज पर्यंत तक किसी प्रकार का आयोग गठित नहीं हुआ। इसमें खाज में खुजली वाली बातें ये हुई की राज्य में प्रशासनिक दादागिरी जारी है। अनियमित कर्मचारियों को अलग अलग विभागों में किसी न किसी बहाने से नौकरी से निकाला जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार केवल इस सरकार के शपथ ग्रहण के पश्चात से ही 100 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया,और ये सिलसिला जारी है जबकि जन घोषणा पत्र में किसी की छंटनी नहीं की जायेगी ऐसा कहा गया था। राज्य में इस प्रशासनिक दादागिरी का खामियाजा कहीं सरकार को आगामी लोकसभा चुनावों में न भुगतना पड़े क्योकि पिछली सरकार भी अपने ऐसे सरकारी दामादों के कारण ही बदनाम हुई और उसे सत्ता से बेदखल होना पड़ा। राज्य में अनियमित कर्मचारियो ने इस बाबत सोचना भी शुरू कर दिया है। विगत लोकसभा चुनावों में हार जीत का अंतर 18 लाख मत रहे थे ,ये अनियमित कर्मचारी इतने ही मत पूरे राज्य में अपने परिवार सहित रखते हैं जिसका उपयोग वो सरकार के खिलाफ भी कर सकते हैं। ऐसे में जबकि राहुल गाँधी लोकसभा की पूरी 11 सीटें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से चाहते हैं और खुद मुख्यमंत्री को भी लगता है कि वह विधानसभा की सफलता लोकसभा में भी दोहरा सकते हैं, अनियमित कर्मचारियों का यह ऊँट कहीं दूसरी करवट हो गया तो 11 का सपना धरा रह जायेगा। केंद्र में एक वोट से भी सरकारें बनी और बिगड़ी हैं ,ऐसे में एक सीट का भी समीकरण यदि इन कर्मचारियों के कारण बिगड़ा तो केंद्र का भी गणित गड़बड़ हो सकता है। राज्य में आचार संहिता जल्द लगने वाली है ऐसे में ये कर्मचारी अपने पक्ष में कुछ न होता देख काफी नाराज भी चल रहे हैं ,चुनावी गणित केवल राज्य के नेता ही नहीं जानते बल्कि इन कर्मचारियों को भी इसकी समझ आ गई है। अब इनके मन में क्या है ,चुनाव परिणाम ही बताएँगे।

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