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सूद,बनिये वसूलते हैं..!!!

सूद,बनिये वसूलते हैं..!!!

नितिन राजीव सिन्हा

मोदी में सूर वीरता के सारे गुण हैं लेकिन उन्हें यह भी समझ लेना होगा कि योद्धा जंग लड़ते हैं और बनिये सूद वसूलते हैं इसलिये सूदखोरी को पराक्रम से न जोड़ा जाये प्रधान सेवक के शब्दों का संयोजन तर्क संगत हो तभी बेहतर है अन्यथा कुछ कहने के लिए कुछ भी कह देना ये तो चलता है..,
आगे उन्होंने वही कहा जो हम उनसे उम्मीद करते हैं लेकिन यह नहीं कहा कि उनका नया भारत १९७१ के उस भारत से जुदा कैसे है जब पाकिस्तान की आड़ में सैन्य मोर्चे पर अमेरिका और चीन के कान मरोड़े गये थे और महाशक्तियों के नाक के नीचे से बंगलादेश निकाल लाया गया था..,
प्रधान सेवक ने कहा कि मोदी से नफ़रत करने वाले देश से नफ़रत करने लगे हैं मतलब साफ़ है कि राष्ट्र भक्त वही हैं जो मोदी भक्त हैं ऐसी फ़ासिस्ट मानसिकता देश काल को गर्त में पहुँचा देती है युद्ध होना और युद्ध के लिये उन्माद का होना दो अलग बातें हैं लिखना होगा कि मोदी की बॉडी लेंगवेज में उन्माद है ये चुनाव के दौर में है तो समझा जा सकता है कि जुमले पारवॉन चढ़ रहे हैं..,
जिस पर लिखना होगा कि-
रंगभूमि नहीं
ये रणभूमि है
यहाँ रंग नहीं
ख़ून बहते हैं
नफ़रत नहीं
धैर्य से काम
लेते हैं..,
उन्माद
नहीं ठीक यहाँ
तू आज
फिर से समर
का शंखनाद
कर,थोड़ा
पुरुषार्थ कर..,

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