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पाकिस्तान को हराना नहीं,उसे जीतना होगा..,

पाकिस्तान को हराना नहीं,उसे जीतना होगा..,

नितिन राजीव सिन्हा

पुलवामा हमला पाकिस्तान परस्तों ने किया न कि पाकिस्तान ने इस वास्तविकता को समझना होगा केवल कौवा कान ले गया कहने से नहीं होगा ध्यान रहे १९७१ के युद्ध शुरू करने से पहले इंदिरा ने नौ माह सैन्य और कूटनीतिक बढ़त प्राप्त करने में लगाए थे सोवियत रूस के साथ रक्षा संधि की थी,तब अमेरिका के नाक के नीचे से बंगलादेश को निकाल कर लाई थी,पाकिस्तान के टुकड़े करके लाई थी तब,अमेरिका और चीन हाथ मलते रह गये अब,पुलवामा के बाद मोदी आँसू बहा रहे हैं कहते फिर रहे हैं एक एक बूँद आँसू का बदला लिया जायेगा इस पर प्रश्न उठता है कि क्या बिना नीति,बिना कूटनीति के यह संभव है..?
आज परमाणु संपन्न दो राष्ट्रों में युद्ध के क्या परिणाम हो सकते हैं इस पर विचार करके ही आगे बढ़ना चाहिये मोदी और अमित शाह के अपरिपक्व बयानों में उन्माद झलकता है यह विकास नहीं विनाश का कारण हो सकता है भारत,उत्तर कोरिया नही है इसका ध्यान प्रधान सेवक को रखना चाहिये..,
पाकिस्तान पड़ोसी है और हमारा टूटा हुआ हिस्सा है हमारी साझा विरासत रही है वह छोटा भाई है और हम बड़े हैं ध्यान रहे चीन,पाकिस्तान जैसी शक्तियाँ छोटे राष्ट्र का इस्तेमाल भारत जैसे बड़े राष्ट्र को संतुलित करने के लिए कर रहे हैं यह उनकी कूटनीतिक सफलता है कि भारत जिसे मोदी का नया भारत कहा जा रहा है वह चीन के ख़िलाफ़ सैन्य शक्ति बन कर खड़ा ही नहीं हो पा रहा है और पाकिस्तान जैसे छोटे देश के साथ उलझे हुए हैं..,
ध्यान रहे मोदी के नेतृत्व में भारत प्रतिशोध आग में जल रहा है जबकि युद्ध में वही जीतता है जो,प्रतिरोध को चुनता है जैसा १९७१ में इंदिरा ने किया था फ़्रांसीसी कहावत है ग़ुस्सा शान्त होने बाद ही सही तरीक़े से बदला लिया जा सकता है जबकि मोदी देश को प्रतिशोध की आग में यह कहकर धकेल रहे हैं आँसू की हर बूँद का बदला लिया जाएगा..,देश के हालिया हालात पर लिखना होगा कि-
ख़ाक होता
न मैं,तो क्या
करता..! उसके
दर का जो
मुझे ग़ुबार
होना था..,

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