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कला के क्षेत्र में सीखने का क्रम पूरे जीवन भर चलता है- मोना सेन

कला के क्षेत्र में सीखने का क्रम पूरे जीवन भर चलता है- मोना सेन

अफसर अली से मोना सेन का एक्सक्लूसिव बातचीत

तीन सौ रुपये में पूरी रात डांस करने से लेकर देश की पहली महिला केश शिल्पी आयोग की अध्यक्ष बनने की कहानी

चिरमिरी । “मोना सेन” का नाम किसी परिचय का मोहताज नही है । छत्तीसगढ़ी फिल्मो की चर्चित गायिका व डांसर मोना सेन के पास देश की पहली महिला केश शिल्पी आयोग की अध्यक्ष बनने का गौरव है । इसके साथ ही वे डॉ. रमन सिंह की सरकार के दौरान “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की छत्तीसगढ़ की ब्रांड एम्बेसडर रह चुकी है । वर्ष 2014 में मोना सेन को “मिनी माता” सम्मान से सम्मानित किया गया था । इसके अलावा उन्हें माता कौशल्या सम्मान, माता अहिल्या सम्मान, नारी शक्ति सम्मान, निर्भया सम्मान, छत्तीसगढ़ की बेटी सम्मान, नोनी सम्मान, वीरांगना सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है । इसके साथ ही उन्हें बेस्ट एंकर, बेस्ट डांसर व बेस्ट सिंगर पुरस्कार भी मिला है । वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सेन नाई समाज के महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष है ।

बीते दिनों मोना सेन चिरमिरी में सम्पन्न सर्व सेन नाई समाज के प्रादेशिक वार्षिक सम्मेलन में शामिल होने चिरमिरी आई थी । इसी दौरान हमारे संवाददाता अफसर अली ने उनसे बातचीत की ।
सुश्री मोना सेन ने बताया कि उनका जन्म कुरूद में एक शिक्षक के परिवार में हुआ । उनके पिता चाहते थे कि वे पढ़ लिखकर डॉक्टर या इंजीनियर बने । लेकिन उनकी रुचि बचपन से ही कला के क्षेत्र में थी । उनकी प्राथमिक शिक्षा महासमुंद में अपने चाचा के यहां हुई । स्कूल के दिनों से ही उन्होंने डांस व गायन के कार्यक्रमो में हिस्सा लेना शुरू कर दिया । उस दौरान उन्हें इनाम के रुप में टिफिन बॉक्स या कापी पेन मिलता था । इस प्रोत्साहन से उनकी कला के प्रति रुचि बढ़ गई । इसके बाद उन्होंने अपने चाचा जोगेन्दर सिंह ठाकुर के कला मंच “दूज के चांद” को ज्वाइन कर लिया । इसी दौरान एक दिन मंच के एंकर के नही आने पर उनके चाचा ने उन्हें एंकरिंग का मौका दिया । सुश्री सेन ने उन दिनों को याद करते हुए थोड़ा रोमांचित होते हुए कहा कि पहली बार बड़े मंच पर एंकरिंग करने का मौका मिलने पर उन्हें घबराहट होने लगी लेकिन डरते डरते उन्होंने आखिरकार एंकरिंग कर ही लिया ।
अपने पहले व्यवसायिक कार्यक्रम के बारे में बताते हुए मोना सेन ने कहा कि उनका पहला डांस का कार्यक्रम बैहर में हुआ जिसके बाद उनके चाचा ने उन्हें बतौर पारिश्रमिक 3 सौ रुपये दिए । यह उनके जीवन की पहली कमाई थी और वह इतना खुश थी कि इन पैसों से उन्होंने लगातार तीन दिनों तक अपने दोस्तों को पार्टी दी ।
सुश्री सेन ने संघर्ष के सवाल पर जबाब देते हुए कहा कि इस पहले प्रदर्शन के बाद उसने पलटकर नही देखा और एक के बाद लगातार स्टेज प्रोग्राम दिए । इसी बीच उन्हें छत्तीसगढ़ी एलबम में काम करने का ऑफर मिला और उन्होंने 350 से ज्यादा छत्तीसगढ़ी एलबम में काम किया । लेकिन उनके पहले एलबम का गाना ‘मया होंगे रे’ जितना हिट हुआ उतना दूसरा कोई गाना नही हुआ ।
सुश्री सेन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि जब लोग एक रात में 3 गानो का क्रोमा करते थे, उस समय मैं एक रात में 18 गानो का क्रोमा करती थी । लोक कला मंच के एक कार्यक्रम के दौरान लगातार 5 दिनों तक दिन और रात में काम करना पड़ा । उस दौरान कई बार मैं मेकअप में ही सो जाती थी ।

एक सवाल के जबाब में मोना सेन ने कहा कि नाचने गाने वाली लड़कियों को समाज न तब अच्छी नजर से देखता था और न आज देखता है । जब मैं कला के इस क्षेत्र में आयी तो शुरू में मेरे परिवार के लोगो ने भी इसका विरोध किया । लेकिन मेरी जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा । इसके बाद जब उन्होंने मेरा घर बसाने के लिए समाज मे चर्चा शुरू किया तो उन्हें ज्यादातर लोगों से यह सुनने को मिला कि नाचने गाने वाली लड़की से कौन शादी करेगा । जिसके बाद मैंने शादी नही करने का फैसला लिया और फिर अपने काम मे जुट गई ।

यह पूछने पर कि अब इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद आप क्या सोचती है, मोना सेन ने बेहद सहजता से जबाब दिया कि मुझे लगता है कि मैं अभी भी सीख रही हूं । कला के क्षेत्र में जीवन के आखिरी पल तक सीखना जारी रहता है ।

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