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शिक्षा गुणवत्ता में सुधार लाने में शिक्षकों के साथ माता-पिता भी करें प्रयास- रेड्डी

शिक्षा गुणवत्ता में सुधार लाने में शिक्षकों के साथ माता-पिता भी करें प्रयास- रेड्डी

महापौर ने चीप हाउस व गोदरीपारा के शासकीय स्कूल में जाकर एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता का लिया जायजा

चिरमिरी। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत किचिरमिरी महापौर के. डोमरु रेड्डी ने उन्हें चिरमिरी के सौंपे गए दो स्कूलों शासकीय प्राथमिक शाला चीफ हाउस व शासकीय प्राथमिक शाला गोदरीपारा पहुंचकर शिक्षा गुणवत्ता का जायजा लिया। महापौर रेड्डी ने शाला परिसर का भ्रमण कर अवलोकन करने के साथ ही बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन, स्कूल रजिस्टरों की भी जांच की।

इस दौरान बच्चों के बीच उनके सीखने के स्तर को जांचते हुए शाला एवं अध्यापन के बारें में बातचीत की। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के प्रगति के बारें में जानकारी लेते हुए कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह करते हुए उन्हें आगे लाने की आवश्यकता के संबंध में बातचीत की। निरीक्षण के दौरान संकुल प्रभारी अभय चतुर्वेदी भी उपस्थित थे। महापौर रेड्डी ने कम हो रही बच्चों की दर्ज संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कहीं न कहीं इसके पीछे निजी विद्यालयों के साथ प्रतिस्पर्धा में शासकीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर में आ रही गिरावट ही बड़ा कारण है। उन्होंने इस दिशा में अभिभावकों में जागरूकता की कमी को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने शिक्षकों को ईमानदारी से प्रयास कर बच्चों को कक्षा अनुरूप दक्षता विकसित करने की समझाइश दी। तथा शिक्षकों से कहा कि सभी बच्चों का सर्वे कर रजिस्टर तैयार रखें तथा कक्षा में अनियमित आने वाले बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने के लिए उनके अभिभावकों को प्रेरित करें। क्योंकि देश को महान बनाने में शिक्षकों के साथ-साथ माता-पिता की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों से विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए सवाल पूछा। पुस्तकों में प्रकाशित महापुरुषों की फोटो दिखा पूछा। इसके साथ ही किताबों के पैराग्राफ्स एवं ब्लैक बोर्ड में सामाजिक सामान्य जानकारी के साथ-साथ गणित के प्रश्नों को हल कराया।

ज्ञात हो कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान चतुर्थ वर्ष में शालाओं की द्वितीय अकादमिक मानीटरिंग 10 से 25 जनवरी के बीच होनी थी। लेकिन मानीटरिंग पूरी नहीं होने के कारण इसे 9 फरवरी तक बढ़ाया गया था। सामाजिक अंकेक्षण में 70 प्रतिशत से कम लाने वालें शालाओं को फोकस शाला के रुप में चुना गया था। खड़गवां ब्लाक के 266 प्राइमरी व मिडिल स्कूलों को शामिल किया गया था। जिसमें 55 स्कूलों को फोकस सूची में शामिल किया गया था। निरीक्षण में बीते वर्षो की अपेक्षा शालाओं पर सुधार का आंकलन तथा प्रतिवर्ष शालाओं से अपेक्षाओं को परखा गया।

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