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एसईसीएल के फर्जी नौकरी से संबंधित मामलों की जांच कलेक्टर कोरिया की अध्यक्षता में गठित राजस्व व एसईसीएल की संयुक्त कमेटी करेगी- डॉ विनय

एसईसीएल के फर्जी नौकरी से संबंधित मामलों की जांच कलेक्टर कोरिया की अध्यक्षता में गठित राजस्व व एसईसीएल की संयुक्त कमेटी करेगी- डॉ विनय

अब एसईसीएल एकतरफा जांच कर 30 साल से कार्यरत मजदूर को नही कर सकती बर्खास्त

विधायक डॉ. विनय जायसवाल की पहल पर कलेक्टर कोरिया की अध्यक्षता में सम्पन्न राजस्व व एसईसीएल की संयुक्त मीटिंग में हुआ फैसला

चिरमिरी । एसईसीएल में कार्यरत मजदूरों के फर्जी नौकरी के मामले में अब एसईसीएल प्रबंधन एकतरफा जांच कर पिछले 30-40 वर्षों से कार्यरत मजदूर को बर्खास्त नही कर सकता । अब ऐसे सभी मामलों की जांच कलेक्टर कोरिया की अध्यक्षता में गठित राजस्व व एसईसीएल की संयुक्त टीम करेगी तथा संबंधित को अपना पक्ष रखने का मौका भी देगी ।

हल्दीबाड़ी के होटल अलविना में आयोजित पत्रकार वार्ता में मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ. विनय जायसवाल ने बताया कि उनके पास कुछ दिनों से लगातार कालरी के मजदूर आकर यह शिकायत कर रहे थे कि किसी व्यक्ति की शिकायत पर कालरी प्रबंधन उनके खिलाफ एकतरफा जांच कर नौकरी से बर्खास्त कर रही है । जिसके बाद उन्होंने कालरी प्रबंधन के साथ ही जिले के कलेक्टर व एसपी से उपरोक्त मामले में चर्चा की । जिसके बाद चिरमिरी में कलेक्टर कोरिया की अध्यक्षता में राजस्व व एसईसीएल के अधिकारियों की एक बैठक सम्पन्न हुई । बैठक में सभी तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करने के बाद उपरोक्त निर्णय लिया गया ।
डॉ. विनय ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों से कुछ आरटीआई कार्यकर्ता एसईसीएल प्रबंधन की मिलीभगत से ब्लैकमेलिंग का खेल खेल रहे थे जिसमें कोई व्यक्ति एसईसीएल प्रबंधन से किसी कालरी कर्मी के विरुद्ध फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने की शिकायत करता था । इसके बाद उस कालरी कर्मी को नौकरी जाने का डर दिखाकर उससे पैसा उगाही की जाती थी । जो कालरी कर्मी पैसा नही देता था उसके विरुद्ध प्रबंधन एकतरफा जांच करके उसे नौकरी से बर्खास्त कर देता था ।
डॉ विनय ने आगे कहा कि आज से 30-40 साल पहले एसईसीएल में लोगो को लोहा उठवाकर भर्ती किया गया था । उस समय कालरी प्रबंधन ने मौखिक रूप से लोगो का नाम पता पूछकर लिख दिया, जिसमे कई लोगो ने अपना घरेलू नाम दर्ज कराया तो किसी का नाम लिखने वाले ने त्रुटिवश गलत लिख दिया । अब 30-40 साल बाद उसकी जांच कर कालरी कर्मी को नौकरी से बर्खास्त करना व उसका पीएफ ग्रेज्युटी रोकना कहां तक न्याय संगत है ? इसके साथ ही नाम व पते से जुड़े मामलों की जांच करना राजस्व विभाग का काम है । इसकी कोई जांच एसईसीएल कैसे कर सकता है ।
डॉ. विनय ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में यदि शिकायत कर्ता की शिकायत झूठी पायी जाती है तो शिकायत कर्ता के साथ ही उन एसईसीएल अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज की जाएगी जिन्होंने गलत शिकायत के आधार पर किसी कालरी कर्मी को नौकरी से बर्खास्त कर उसके वाजिब हक से वंचित किया है ।

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