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*सिर्फ 48 हजार शिक्षको के संविलियन का आंदोलन हो,अन्य मांगे संविलियन को रोकने का षड्यंत्र*

*सिर्फ 48 हजार शिक्षको के संविलियन का आंदोलन हो,अन्य मांगे संविलियन को रोकने का षड्यंत्र*

संविलियन के नाम पर वेतन विसगति क्रमोन्नत्ति और पदोन्नति की मांग करने वाले आंदोलन से संविलियन से वंचित शिक्षक दूर रहेंगे।सिर्फ संविलियन हमारी मांगे है इसके अलावा अन्य मांगे सरकार की गुमराह करने और संविलियन को रोकने का षड्यंत्र है।संविलियन संघर्ष समिति सिर्फ संविलियन की मांगों, आंदोलन का समर्थन करती है।कोई भी संगठन सिर्फ संविलियन के लिए आंदोलन करती हैं तो हम उसका समर्थन करते है और उसका साथ देंगे।इसके अलावा अन्य मांगे संविलियन से वंचित शिक्षको के लिए अप्रसंगिक है।
सरकार ने सिर्फ संविलियन का वादा किया है वेतन विसगति कर्ममोन्नति पदोन्नति की मांग अभी सरकार के सामने रखकर संविलियन की फैसले को विलंब और रोकने का कायराना हरकत अन्य संगठन को नही करना चाहिये ।बिना संविलियन के अन्य मांगो का हमारे लिए कोई मतलब नही है।
संविलियन संघर्ष समिति के प्रांतीय संचालक शिव डड़सेना के कहा कि 15 दिन के पिछले आंदोलन सिर्फ 1 लाख 80 हजार शिक्षको के संविलियन के लिए लड़ी गयी थी।48 हजार शिक्षको को संविलियन से वंचित कर दिए।इसलिए सिर्फ उनके संविलियन के लिए आंदोलन होना चाहिए।क्या वो आंदोलन सिर्फ 8 वर्ष पूर्ण कर चुके शिक्षको के संविलियन के लिए लड़ी गयी थी।यदि नही तो सभी संगठनों को आज सिर्फ संविलियन के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए।आंदोलन करना चाहिए।वरना फिर संविलियन के नाम पर अपनी मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन के बुलाकर घोखा देना बंद करे।संविलियन के नाम पर एक बार पुनः क्रमोन्नत्ति और पदोन्नति वेतन विसगति की मांगों को मनवाने के आंदोलन का विरोध करते है।
जब सरकार ने 2 वर्ष पूर्ण कर चुके शिक्षको के संविलियन का वादा किया है इसी बीच कुछ संगठन 2 वर्ष में पदोन्नति और कर्ममोन्नति कि नई मांग सरकार के सामने रखकर संविलियन विरोधी हरकत कर रहे है ऐसे लोगो को मुंहतोड़ जवाब देंगे।
प्रदेश के संविलियन से वंचित शिक्षको से अपील किया जाता है कि सिर्फ संविलियन के एक सुत्रीय आंदोलन में शामिल हो,उक्त निर्णय 27 जनवरी को प्रांतीय बैठक में लिया गया है।

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