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जाते-जाते मोदी सरकार अदानी की सभी खनन परियोजनाओं को मंजूरी देने में लगी है, 842 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लगभग एक लाख पेड़ कटेंगे

जाते-जाते मोदी सरकार अदानी की सभी खनन परियोजनाओं को मंजूरी देने में लगी है, 842 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लगभग एक लाख पेड़ कटेंगे

आलोक शुक्ला

चुनाव पूर्व मोदी सरकार अदानी की सभी खनन परियोजनाओ को मंजूरी देने में लगी हैं l राज्य का वन विभाग भी लगा हैं वनों के विनाश में l वन विभाग की जगह इसे खनन विभाग कहना चाहिए

(परसा कोल ब्लॉक हेतु 842 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लगभग 1 लाख पेड़ कटेंगे )

सरगुजा स्थित हसदेव अरण्य में प्रस्तावित परसा कोला ब्लाक की वन स्वीकृति हेतु FAC की बैठक 19 दिसंबर 2018 को हुई l

इसके मिनुट्स 12 जनवरी 2019 को अपलोड हुए जिसमे कहा गया की FAC की सब कमेटी क्षेत्र का भ्रमण करेगी,,

अगले दिन ही FAC का एजेंडा आ गया जिसमे 15 जनवरी को पुनः परसा की वन स्वीकृति के प्रस्ताव पर निर्णय होना हैं l

क्या 3 दिन में ही FAC ने क्षेत्र का भ्रमण कर लिया? और यदि किया हैं तो प्रभावित ग्रामीणों को कोई सूचना या उन्हें अपनी बात रखने का अवसर क्यों नही दिया गया ?

प्रभावित गाँव में अभी भी वनाधिकार मान्यता कानून की प्रक्रिया लंबित हैं और ग्रामसभाओ ने वन स्वीकृति के प्रस्ताव का विरोध किया हैं तो फिर FAC इस प्रस्ताव पर चर्चा कैसे कर सकती हैं ?

वनाधिकार मान्यता कानून 2006 में स्पष्ट प्रावधान हैं की जब तक वनाधिकारो की मान्यता की प्रक्रिया समाप्त नही होती और ग्रामसभा लिखित सहमती प्रदान नही करती तब तक किसी भी परियोजना को वन स्वीकृति नही मिल सकती l

क्या राज्य सरकार इस गैरकानूनी वन भूमि स्वीकृति के प्रस्ताव पर अपनी आपति दर्ज करवाएगी ?

क्यों महत्वपूर्ण हैं यह वन क्षेत्र –

यू पी ए ने इस क्षेत्र को खनन हेतु नो गो क्षेत्र घोषित किया था जिसका उल्लंघन वर्तमान मोदी सरकार कर रही हैं l

इस सम्पूर्ण वन क्षेत्र में schedule 1 के वन्यप्राणी हैं और हाथी का माईग्रेटरी कोरिडोर हैं ( हालाकि वन विभाग इसे छुपता हैं और लिखता हैं की हाथी यदा कदा आते हैं )

यह सम्पूर्ण वन क्षेत्र बांगो बैराज का केचमेंट हैं जिससे जांजगीर जिले में 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई होती हैं l

जैव विविधता से परिपूर्ण सघन वन क्षेत्र हैं l

इस वन क्षेत्र को अदानी के मुनाफे लिए लिए उजाडा जा रहा हैं वह भी कानूनों और प्रक्रियाओ को तक पर रखकर l राज्य सरकार इस इस मामले पर शीघ्र हस्तक्षेप की अपेक्षा हैं l

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