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देश में भाईचारा और एकजुटता से देशहित के काम आये

देश में भाईचारा और एकजुटता से देशहित के काम आये

लेखकः-ई . मनोज कुमार सिन्हालेखकः-ई . मनोज कुमार सिन्हाबसंत विहार, जशपुरनगर

देश क्या पूरे विश्व में शान्ति सम्भव, अगर मेरे विचार/सिद्धान्त पर सभी लोग गहराई से पालन करें। (मेरे विचार/सिद्धांत को देश व विश्व के जन-जन तक पहुंचाने हेतु सभी लोगों से मेरा आह्वान/अपील
’’इंसानियत (मानव धर्म) का तात्पर्य सभी लोग चाहे वे किसी सम्प्रदाय से हों, अपने आपको किसी सम्प्रदाय या जाति से पहले अपने आपको एक इंसान मानें एवं मानव धर्म अर्थात् भाईचारे के साथ मानव समाज के विकास के लिये एक-दूसरे के कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें एवं प्रकृति से प्रेम करने के साथ उसके प्रति सजग रहें एवं प्रकृति के नियम का पालन करें। समाज के सभी वर्ग सृष्टि चलाने में अति आवश्यक अतः हर वर्ग एक-दूसरे का आदर करे।’’ सम्भवतः धर्म निरपेक्षता की परिभाषा यही होनी चाहिए । देश एवं पूरे विश्व के लोगों को मानव धर्म निभाने के पश्चात् अपने धर्मानुसार उपासना/ईबादत/प्रार्थना करनी चाहिए, इसमें किसी को कोई आपŸिा नहीं होना चाहिए इसे लोगों के स्वविवेक पर छोड़ देना चाहिए।’’
इंसानियत (मानव धर्म) के अन्तर्गत अयोध्या में भगवान राम जन्मभूमि पर राम मन्दिर का निर्माण होना चाहिए या नहीं ?मेरा एक दृष्टिकोण
इस इंसानियत धर्म के अन्तर्गत मेरा विचार है कि देश के बहुसंख्यक सम्प्रदाय के लोगों की आस्था भगवान राम से है एवं उनके जन्मस्थल का अयोध्या में होना उनके धर्म ग्रन्थों में मिलता है, किन्तु स्वतंत्रता के 70 वर्ष बीत जाने के उपरान्त भी अयोध्या में राम मन्दिर का न बन पाना अत्यन्त दुखदायी है, अन्य सम्प्रदायों के आस्था स्थल जैसे मक्का मदीना, वेटिक सिटी व अन्य सम्प्रदायों के धार्मिक स्थलों पर अन्य सम्प्रदायों का कोई हस्तक्षेप नहीं, पर हमारे बहुसंख्यक सम्प्रदाय की आस्था पर मानव धर्म का पालन न करते हुए दूसरे सम्प्रदाय के कट्टरपंथियों द्वारा हस्तक्षेप और सहयोग की भावना न होने के कारण आज तक राम मन्दिर का निर्माण नहीं हो पाया है  राम जन्मभूमि एवं मन्दिर उनमें से एक है । देश का बहुसंख्यक सम्प्रदाय अधिकांशतः उदारवादी विचारधारा एवं विघटित है, जिस कारण देश के अल्पसंख्यक सम्प्रदाय जिनकी विचारधारा अधिकांशतः कट्टरवाद है, स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही कुछ राजनीतिक दलों के कृपापात्र बने हुए हैं एवं मानवधर्म का पालन न करते हुंए देश को विघटित एवं हिंसा की राह पर अग्रसर करते रहे हैं, इसलिए देश में ही ’’भारत तेरे टुकड़े होंगे इन्साअल्लाह-2’’ जैसे नारे सुनने को मिल जाता है ।
अतः सभी सम्प्रदाय एवं सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर बैठकर मानवधर्म के अनुसार राम मन्दिर बनाने के लिए यथाशीघ्र पहल करना चाहिए ।
अयोध्या में राम मन्दिर बनने से वह देश के बहुसंख्यक समाज का मुख्य तीर्थ हो जायेगा जिससे देश व विदेश का मुख्य पर्यटक स्थल हो जायेगा, जिससे अयोध्या के आस-पास सर्वांगीण विकास होगा, साथ ही सभी सम्प्रदायों को रोजगार एवं व्यापार में अत्यधिक बढ़ोत्तरी होगी, जिससे सभी सम्प्रदायों के मानव जाति के बीच अपनापन होगा और देश व मानव जाति के विकास में अहम भूमिका प्रदान करेगा ।

देश के बहुसंख्यक सम्प्रदाय को अपने सभ्यता पर गर्व करना चाहिये जहां देवी-देवताओं की उपासना के साथ प्रकृति प्रेम (सूर्य एवं समस्त ग्रहों की अर्चना, पेड़-पौधे की पूजा, नदी व अग्नि की उपासना एवं पशु-पक्षी जिनमें से अधिकांशतः हमारे देवी-देवताओं के वाहक माने जाते हैं) के प्रति श्रद्धा बढ़ाता है, निःसंदेह हमारे में समय के साथ कुछ कुरीतियों का जन्म हुआ, हमें अपने कुरीतियों को दूर करने के प्रयास के साथ एकजुटता दिखानी चाहिए जिससे देश के अल्पसंख्यक सम्प्रदाय को कृपापात्र बनाने वाले राजनीतिक दलों में भय व्याप्त हो।
वर्तमान में यह विवाद दो सम्प्रदाय के बीच सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा है, निर्णय क्या होगा और कब होगा इस पर प्रश्नवाचक चिन्ह है । इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करता, देश के सभी सम्प्रदाय के शिक्षित व सभ्य लोग समझदार हैं।
मेरे विचार से मानव धर्म ही सर्वोच्च है जो हमें देश व इस सृष्टि को एक नई दिशा देने में सहायक होगा ।

लेखकः-इ. मनोज कुमार सिन्हाबसंत विहार, जशपुरनगर

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2 comments

  1. प्रतीक
    April 19th, 2018 14:11

    बहुत ही नेक विचार है

  2. अशोक कुमार दास
    April 20th, 2018 7:59

    बहुत ही सुंदर लेख, कोर्ट से उम्मीद है राम मंदिर के पक्ष में फैसला देगा।

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