सिंबा के सरदार..,

सिंबा के सरदार..,

नितिन राजीव सिन्हा

पूर्व मुख्य मंत्री रमन सिंह ने शराब नीति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि मैं कह रहा हूँ सिर्फ़ ६० दिन रुक जाइये,ठेकेदारों के हाथों शराब की दुकानें होंगी,गली गली में कोचिये हाथों में बोतल लिये घुमेंगे..,

लिखना होगा कि रमन सिंह की राजनीति दारू के दम पर चमकती रही है तब जनता पीती और सरकार पिलाती थी भाजपा के नेताओं का भरोसा २०१८ के विधान सभा चुनाव में टूटा है क्योंकि वो यह मानकर चल रहे थे कि दारू का शुरूर मतदाताओं पर चढ़ेगा और चौथी बार कमल खिलेगा..,

लेकिन हुआ उलटा पीने वालों ने पिलानें वालों के मंसूबों को नाली में बह जानें दिया और रमन मंडली का छत्तीसगढ़ से सूपड़ा साफ़ हो गया..,

कांग्रेस का आरोप रहा है कि सिंबा शराब के भागीदार पनामा के पापा रहे हैं इसी लिये शराब की नीति तत्कालीन सरकार में बदली गई और सिंबा सरकारी शराब दुकानों की शोभा की वस्तु बन गई थी अरबों रुपयों के मुनाफ़े के कारोबार पर बट्टा लगते हुए देख कर सिंबा के सरदार का दर्द उभरा है और भूपेश सरकार की शराब नीतियों पर उन्होंने अंगुली उठाया है..,रमन सिंह की मानसिक दशा पर लिखना होगा कि-

कुछ भी

बचा नहीं

कहनें को

हर बात

हो गई

अब,थोड़ी

पी लें

कि सरकार सड़क

पर आ गई..,

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