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*ऐतिहासिक और बेहद रोचक रहा छत्तीसगढ़ विधानसभा 2018 का चुनाव, विश्व पटल पर हो रही है चर्चाएँ – प्रकाशपुंज पांडेय*

*ऐतिहासिक और बेहद रोचक रहा छत्तीसगढ़ विधानसभा 2018 का चुनाव, विश्व पटल पर हो रही है चर्चाएँ – प्रकाशपुंज पांडेय*

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के राजनीतिक विश्लेषक और समाज सेवी प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजों पर अपनी राय जाहिर की है।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय के नज़रिए से छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के परिणामों की चर्चा न सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में हो रही है। उन्होंने उल्लेख किया है कि 12 दिसंबर को अमेरिका के एक अखबार में छपी खबर में लिखा है कि “मोदी हैज लॉस्ट द सेमीफाइनल” जिससे साफ हो जाता है कि वर्ष 2013-14 के बाद से नरेंद्र मोदी के नाम की जो लहर देश में शुरू हुई थी उसने देश के लगभग सभी राज्यों में अपनी सरकार बना ली थी। लेकिन उस लहर पर हाल ही में हुए इन पांच राज्यों के चुनाव खासकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के नतीजों ने रोक लगा दी और अप्रत्याशित रूप से सभी को चौंका दिया।

खासकर अगर छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां तो किसी पार्टी ने नहीं सोचा था कि छत्तीसगढ़ की जनता इस प्रकार का जनमत देगी। इससे एक बात विश्व पटल पर साबित हो गई कि छत्तीसगढ़ की जनता की सोच और समझदारी बेहद ही उच्च कोटि की है और वह जानती है कि किस दिशा में अपने भविष्य का चयन कैसे करें, क्योंकि एक तरफ उसने 15 साल भारतीय जनता पार्टी को समय दिया और अब परिवर्तन स्वरूप उसमें कांग्रेस को अपना संपूर्ण बहुमत दिया है।

इस बार इस रणभूमि में छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी अपनी नई नवेली पार्टी के साथ हाथ आज़माने के लिए उतरे थे जिन्हें चुनाव के पहले बहुजन समाजवादी पार्टी का भी साथ मिल गया था लेकिन उनकी भी अपेक्षा के परे उनके गठबंधन को मात्र 7 सीटें हैं नसीब हो पाईं। उधर 15 सालों से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी को मात्र 15 सीटें मिली। इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बहुत से विधायक और मंत्री तक अपना चुनाव हार गए जिसमें मुख्य है राजेश मूणत जिन्हें कांग्रेस के प्रत्याशी विकास उपाध्याय ने पराजित किया और प्रेम प्रकाश पांडे जिन्हें कांग्रेस के देवेंद्र यादव ने पटखनी दी। वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और मंत्री भैया लाल रजवाड़े भी अपना चुनाव हार गए।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने बताया कि 6 महीने पहले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने सर्वे में भारतीय जनता पार्टी को चेता दिया था कि उसके कई मौजूदा विधायक और मंत्री हारने वाले हैं, अतः विधानसभा चुनाव के मध्य नजर नजर टिकटों के बँटवारे में विशेष सावधानी बरतें, लेकिन शायद भाजपा ने आर एस एस की नसीहत से सीख नहीं ली जिसका खामियाजा उन्हें विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा। अब चुनाव के पश्चात कांग्रेस पार्टी के सामने मुख्यमंत्री बनाने की जटिल समस्या बनी हुई है जो कि संभवत 13 या 14 दिसंबर को घोषित की जा सकती है जिस पर अंतिम मोहर कांग्रेस पार्टी के आला कमान राहुल गांधी लगाएंगे। अब देखने वाली बात यह है कि नए मुख्यमंत्री के तौर पर जो भी शपथ लेगा वह आने वाले समय पर अपना कितना प्रभाव छोड़ेगा, क्योंकि कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करना, लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना और साथ ही साथ संगठन में व्याप्त गुटबाज़ी और भारी असंतोष को दूर करते हुए संगठन को एकजुट करना उस मुख्यमंत्री के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होगी जिससे यह साफ स्पष्ट होता है कि “मुख्यमंत्री का ताज, ताज तो होगा लेकिन कांटो भरा।”
खैर जो भी हो छत्तीसगढ़ की जनता ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी छाप ज़रूर छोड़ दी है।

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